Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में उत्पन्ना एकादशी 2018 रवि 2 दिसंबर या सोम 3 दिसंबर
व्रत · समय UTC−2 में
Ipameri में उत्पन्ना एकादशी 2018 कब है?
स्मार्त
रविवार 2 दिसंबर
वैष्णव
सोमवार 3 दिसंबर
मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में रवि 2 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · सोमवार 3 दिसंबर
वैष्णव · मंगलवार 4 दिसंबर
उत्पन्ना एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- रविवार 2 दिसंबर
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06:28व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 3 दिसंबर
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11:20–19:36पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- सोमवार 3 दिसंबर
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06:28व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 4 दिसंबर
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06:29–19:37पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में उत्पन्ना एकादशी रवि 2 दिसंबर या सोम 3 दिसंबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में उत्पन्ना एकादशी रवि 2 दिसंबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव सोम 3 दिसंबर को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 06:30 से। एकादशी: 06:30 से 05:30 सोम तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 05:30 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 06:30 रवि से 05:30 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह रवि 2 दिसंबर को 06:30 पर, उस सूर्योदय (06:28) के बाद, लगती है और सोम 3 दिसंबर को 05:30 पर, अगले सूर्योदय (06:28 सोम) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: रवि 2 दिसंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। रवि 2 दिसंबर को अरुणोदय (04:52–06:28) में दशमी है। सोम 3 दिसंबर को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 05:30 तक, फिर द्वादशी): सोम 3 दिसंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · सोम 3 दिसंबर, 11:20–19:36 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 3 दिसंबर 05:30 से मंगल 4 दिसंबर 04:50 तक है; हरिवासर 11:20 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:36) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:06 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · मंगल 4 दिसंबर, 06:29–19:37 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी मंगल 4 दिसंबर को 04:50 पर, रात में, अरुणोदय (04:53) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:29) से सूर्यास्त (19:37) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।