Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में उत्पन्ना एकादशी 2017 सोम 13 नवंबर या मंगल 14 नवंबर
व्रत · समय UTC−2 में
Ipameri में उत्पन्ना एकादशी 2017 कब है?
स्मार्त
सोमवार 13 नवंबर
वैष्णव
मंगलवार 14 नवंबर
मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में सोम 13 नवंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · मंगलवार 14 नवंबर
वैष्णव · बुधवार 15 नवंबर
उत्पन्ना एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- सोमवार 13 नवंबर
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06:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 14 नवंबर
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11:14–19:25पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- मंगलवार 14 नवंबर
-
06:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 15 नवंबर
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04:53–05:40पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में उत्पन्ना एकादशी सोम 13 नवंबर या मंगल 14 नवंबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में उत्पन्ना एकादशी सोम 13 नवंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव मंगल 14 नवंबर को व्रत रखते हैं।
दशमी 04:55 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:55 से 05:05 मंगल तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 05:05 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 04:55 सोम से 05:05 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 13 नवंबर को सूर्योदय पर है, 06:29: सोम 13 नवंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। सोम 13 नवंबर को दशमी 04:55 तक है, अरुणोदय (04:53–06:29) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 05:05 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव मंगल 14 नवंबर को व्रत रखते हैं: मंगल 14 नवंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · मंगल 14 नवंबर, 11:14–19:25 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 14 नवंबर 05:05 से बुध 15 नवंबर 05:40 तक है; हरिवासर 11:14 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:25) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:04 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · बुध 15 नवंबर, 04:53–05:40 (अरुणोदय से, Tithika की परिपाटी)
द्वादशी बुध 15 नवंबर को 05:40 पर, अरुणोदय (04:53) लगने के बाद और सूर्योदय (06:29) से पहले, समाप्त होती है। द्वादशी छोटी हो तो निर्णयसिंधु, मत्स्य पुराण के अनुसार, पारण भोर में, द्वादशी समाप्त होने से पहले कराता है। Tithika इसे अरुणोदय से आरंभ करता है: Tithika की परिपाटी।
नियम
मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।