tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में षटतिला एकादशी 2002 पारण समय 07:03⁠–⁠19:50, शुक्र 8 फ़रवरी

व्रत · समय UTC−2 में

Ipameri में षटतिला एकादशी 2002 कब है?

गुरुवार 7 फ़रवरी

माघ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · पौष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में गुरु 7 फ़रवरी का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 8 फ़रवरी

पारण समय
07:03–19:50
12 घं 47 मि · Tithika की परिपाटी

षटतिला एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 7 फ़रवरी
  • 07:03व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 8 फ़रवरी
  • 07:03–19:50पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंषटतिला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में षटतिला एकादशी गुरु 7 फ़रवरी को क्यों है?

षटतिला एकादशी गुरु 7 फ़रवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 22:35 बुध से 23:12 तक।

एकादशी 23:12 गुरु पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 7 फ़रवरी को सूर्योदय पर है, 07:03: गुरु 7 फ़रवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 22:35 बुध पर, उससे (05:27–07:03) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 8 फ़रवरी, 07:03–19:50 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 7 फ़रवरी 23:12 से शनि 9 फ़रवरी 00:18 तक है; हरिवासर 05:29 पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 8 फ़रवरी को सूर्योदय (07:03) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:50) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:36 तक, करते हैं।

नियम

माघ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · पौष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।