Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 1932 1932 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−2 में
Ipameri में सफला एकादशी 1932 कब है?
1932 में दो बार
स्मार्त
रविवार 3 जनवरी
वैष्णव
सोमवार 4 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में रवि 3 जनवरी का पूरा पंचांगशुक्रवार 23 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में शुक्र 23 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · सोमवार 4 जनवरी
वैष्णव · मंगलवार 5 जनवरी
शनिवार 24 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
रवि 3 जनवरी
स्मार्त
- रविवार 3 जनवरी
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06:42व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 4 जनवरी
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09:43–19:52पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- सोमवार 4 जनवरी
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06:42व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 5 जनवरी
-
06:43–19:52पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
शुक्र 23 दिसंबर
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06:36व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 24 दिसंबर
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06:36–19:45पारण समयव्रत खोलने का समय
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
रवि 3 जनवरी और सोम 4 जनवरी क्यों?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में सफला एकादशी रवि 3 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव सोम 4 जनवरी को व्रत रखते हैं।
दशमी 06:19 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:19 से 04:14 सोम तक।
एकादशी 04:14 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 06:19 रवि से 04:14 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 3 जनवरी को सूर्योदय पर है, 06:42: रवि 3 जनवरी।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। रवि 3 जनवरी को दशमी 06:19 तक है, अरुणोदय (05:06–06:42) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 04:14 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव सोम 4 जनवरी को व्रत रखते हैं: सोम 4 जनवरी।
व्रत का पारण
स्मार्त · सोम 4 जनवरी, 09:43–19:52 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 4 जनवरी 04:14 से मंगल 5 जनवरी 02:12 तक है; हरिवासर 09:43 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:52) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:20 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · मंगल 5 जनवरी, 06:43–19:52 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी मंगल 5 जनवरी को 02:12 पर, रात में, अरुणोदय (05:07) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:43) से सूर्यास्त (19:52) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
शुक्र 23 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी शुक्र 23 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 01:45 से 22:56 तक।
एकादशी 22:56 शुक्र पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 23 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 06:36: शुक्र 23 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 01:45 पर, उससे (05:00–06:36) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · शनि 24 दिसंबर, 06:36–19:45
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 23 दिसंबर 22:56 से शनि 24 दिसंबर 19:45 तक है; हरिवासर 04:08 पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 24 दिसंबर को सूर्योदय (06:36) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:15 तक, करते हैं।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।