Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 1910 1910 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में सफला एकादशी 1910 कब है?
1910 में दो बार
शुक्रवार 7 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में शुक्र 7 जनवरी का पूरा पंचांगसोमवार 26 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में सोम 26 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
शनिवार 8 जनवरी
मंगलवार 27 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
शुक्र 7 जनवरी
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05:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 8 जनवरी
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05:45–08:21पारण समयव्रत खोलने का समय
सोम 26 दिसंबर
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05:37व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 27 दिसंबर
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10:07–18:49पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
शुक्र 7 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी शुक्र 7 जनवरी को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।
दशमी 04:43 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:43 से 06:46 शुक्र तक।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:43 गुरु से 06:46 तक।
द्वादशी: 06:46 शुक्र से 08:14 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, गुरु 6 जनवरी को 05:37 और शुक्र 7 जनवरी को 05:38। एकादशी (गुरु 6 जनवरी 04:43 से शुक्र 7 जनवरी 06:46 तक) और द्वादशी (शुक्र 7 जनवरी 06:46 से शनि 8 जनवरी 08:14 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: शुक्र 7 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: गुरु 6 जनवरी को दशमी 04:43 तक है, उसके भीतर (04:01–05:37); शुक्र 7 जनवरी को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · शनि 8 जनवरी, 05:45–08:21
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 7 जनवरी 06:46 से शनि 8 जनवरी 08:14 तक है; हरिवासर 13:08 शुक्र पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 8 जनवरी को सूर्योदय (05:38) से होता है।
सोम 26 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी सोम 26 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:34 से 03:19 मंगल तक।
एकादशी 03:19 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 00:34 सोम से 03:19 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 26 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:31: सोम 26 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:34 पर, उससे (03:55–05:31) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · मंगल 27 दिसंबर, 10:07–18:49 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 27 दिसंबर 03:19 से बुध 28 दिसंबर 06:07 तक है; हरिवासर 10:01 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:42) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:09 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।