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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 1911 पारण समय 10:41⁠–⁠18:43, शनि 16 दिसंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में सफला एकादशी 1911 कब है?

शुक्रवार 15 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शुक्र 15 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 16 दिसंबर

पारण समय
10:41–18:43
8 घं 2 मि · Tithika की परिपाटी

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शुक्रवार 15 दिसंबर
  • 05:32व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 16 दिसंबर
  • 10:41–18:43पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में सफला एकादशी शुक्र 15 दिसंबर को क्यों है?

सफला एकादशी शुक्र 15 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 02:57 से 04:10 शनि तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 04:10 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 02:57 शुक्र से 04:10 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 15 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:25: शुक्र 15 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 02:57 पर, उससे (03:49–05:25) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 16 दिसंबर, 10:41–18:43 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 16 दिसंबर 04:10 से रवि 17 दिसंबर 05:50 तक है; हरिवासर 10:35 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:37) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:04 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।