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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 1905 1905 में 2 तारीख़ें

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में सफला एकादशी 1905 कब है?

1905 में दो बार

रविवार 1 जनवरी

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में रवि 1 जनवरी का पूरा पंचांग

शुक्रवार 22 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शुक्र 22 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 2 जनवरी

पारण समय
05:41–17:18
11 घं 37 मि

शनिवार 23 दिसंबर

पारण समय
05:36–09:59
4 घं 23 मि

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

रवि 1 जनवरी

  • 05:41व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 2 जनवरी
  • 05:41–17:18पारण समयव्रत खोलने का समय

शुक्र 22 दिसंबर

  • 05:35व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 23 दिसंबर
  • 05:36–09:59पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?

चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।

रवि 1 जनवरी क्यों?

सफला एकादशी रवि 1 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 20:07 शनि से 18:33 तक।

एकादशी 18:33 रवि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 1 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:34: रवि 1 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 20:07 शनि पर, उससे (03:58–05:34) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 2 जनवरी, 05:41–17:18

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 1 जनवरी 18:33 से सोम 2 जनवरी 17:12 तक है; हरिवासर 00:13 पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 2 जनवरी को सूर्योदय (05:35) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:13 तक, करते हैं।

शुक्र 22 दिसंबर क्यों?

सफला एकादशी शुक्र 22 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 15:41 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 15:41 गुरु से 12:54 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 22 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:29: शुक्र 22 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 15:41 गुरु पर, उससे (03:53–05:29) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 23 दिसंबर, 05:36–09:59

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 22 दिसंबर 12:54 से शनि 23 दिसंबर 09:53 तक है; हरिवासर 18:08 शुक्र पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 23 दिसंबर को सूर्योदय (05:29) से होता है।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।