tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 1906 पारण समय 05:31⁠–⁠18:42, गुरु 13 दिसंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में सफला एकादशी 1906 कब है?

बुधवार 12 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में बुध 12 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

गुरुवार 13 दिसंबर

पारण समय
05:31–18:42
13 घं 11 मि · Tithika की परिपाटी

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • बुधवार 12 दिसंबर
  • 05:31व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 13 दिसंबर
  • 05:31–18:42पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में सफला एकादशी बुध 12 दिसंबर को क्यों है?

सफला एकादशी बुध 12 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 08:08 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 08:08 मंगल से 05:47 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 12 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:24: बुध 12 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 08:08 मंगल पर, उससे (03:48–05:24) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 13 दिसंबर, 05:31–18:42 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी गुरु 13 दिसंबर को 02:48 पर, रात में, अरुणोदय (03:49) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:25) से सूर्यास्त (18:35) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।