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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में रमा एकादशी 2023 पारण समय 07:39⁠–⁠11:06, शुक्र 10 नवंबर

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में रमा एकादशी 2023 कब है?

गुरुवार 9 नवंबर

कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में गुरु 9 नवंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 10 नवंबर

पारण समय
07:39–11:06
3 घं 27 मि

रमा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 9 नवंबर
  • 07:38व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 10 नवंबर
  • 07:39–11:06पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंरमा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में रमा एकादशी गुरु 9 नवंबर को क्यों है?

रमा एकादशी गुरु 9 नवंबर को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

दशमी 06:53 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:53 से 09:12 गुरु तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:53 बुध से 09:12 तक।

द्वादशी: 09:12 गुरु से 11:06 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, बुध 8 नवंबर को 07:37 और गुरु 9 नवंबर को 07:38। एकादशी (बुध 8 नवंबर 06:53 से गुरु 9 नवंबर 09:12 तक) और द्वादशी (गुरु 9 नवंबर 09:12 से शुक्र 10 नवंबर 11:06 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: गुरु 9 नवंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: बुध 8 नवंबर को दशमी 06:53 तक है, उसके भीतर (06:01–07:37); गुरु 9 नवंबर को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 10 नवंबर, 07:39–11:06

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 9 नवंबर 09:12 से शुक्र 10 नवंबर 11:06 तक है; हरिवासर 15:40 गुरु पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 10 नवंबर को सूर्योदय (07:39) से होता है।

नियम

कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।