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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में रमा एकादशी 2022 पारण समय 07:18⁠–⁠16:33, शनि 22 अक्टूबर

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में रमा एकादशी 2022 कब है?

शुक्रवार 21 अक्टूबर

कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में शुक्र 21 अक्टूबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 22 अक्टूबर

पारण समय
07:18–16:33
9 घं 15 मि

रमा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शुक्रवार 21 अक्टूबर
  • 07:17व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 22 अक्टूबर
  • 07:18–16:33पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंरमा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में रमा एकादशी शुक्र 21 अक्टूबर को क्यों है?

रमा एकादशी शुक्र 21 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 14:35 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 14:35 गुरु से 15:53 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 21 अक्टूबर को सूर्योदय पर है, 07:17: शुक्र 21 अक्टूबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 14:35 गुरु पर, उससे (05:41–07:17) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 22 अक्टूबर, 07:18–16:33

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 21 अक्टूबर 15:53 से शनि 22 अक्टूबर 16:33 तक है; हरिवासर 22:03 शुक्र पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 22 अक्टूबर को सूर्योदय (07:18) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:28 तक, करते हैं।

नियम

कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।