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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में रमा एकादशी 2024 पारण समय 13:01⁠–⁠18:01, सोम 28 अक्टूबर

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में रमा एकादशी 2024 कब है?

रविवार 27 अक्टूबर

कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में रवि 27 अक्टूबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 28 अक्टूबर

पारण समय
13:01–18:01
5 घं 0 मि · Tithika की परिपाटी

रमा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 27 अक्टूबर
  • 07:24व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 28 अक्टूबर
  • 13:01–18:01पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंरमा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में रमा एकादशी रवि 27 अक्टूबर को क्यों है?

रमा एकादशी रवि 27 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:54 से 06:21 सोम तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 06:21 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 03:54 रवि से 06:21 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 27 अक्टूबर को सूर्योदय पर है, 07:24: रवि 27 अक्टूबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 03:54 पर, उससे (05:48–07:24) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 28 अक्टूबर, 13:01–18:01 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 28 अक्टूबर 06:21 से मंगल 29 अक्टूबर 09:02 तक है; हरिवासर 13:01 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:01) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:32 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।