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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में देवउठनी एकादशी 2028 पारण समय 11:28⁠–⁠18:00, रवि 29 अक्टूबर

व्रत · समय UTC+4 में · इसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं

Sevan में देवउठनी एकादशी 2028 कब है?

शनिवार 28 अक्टूबर

कार्तिक शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में शनि 28 अक्टूबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

रविवार 29 अक्टूबर

पारण समय
11:28–18:00
6 घं 32 मि · Tithika की परिपाटी

देवउठनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शनिवार 28 अक्टूबर
  • 07:25व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 29 अक्टूबर
  • 11:28–18:00पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंदेवउठनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में देवउठनी एकादशी शनि 28 अक्टूबर को क्यों है?

देवउठनी एकादशी शनि 28 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 02:17 से 04:51 रवि तक।

एकादशी 04:51 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 02:17 शनि से 04:51 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 28 अक्टूबर को सूर्योदय पर है, 07:25: शनि 28 अक्टूबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 02:17 पर, उससे (05:49–07:25) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 29 अक्टूबर, 11:28–18:00 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 29 अक्टूबर 04:51 से सोम 30 अक्टूबर 07:21 तक है; हरिवासर 11:28 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:00) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:33 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

कार्तिक शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।