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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में देवउठनी एकादशी 2029 पारण समय 07:48⁠–⁠17:40, शनि 17 नवंबर

व्रत · समय UTC+4 में · इसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं

Sevan में देवउठनी एकादशी 2029 कब है?

शुक्रवार 16 नवंबर

कार्तिक शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में शुक्र 16 नवंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 17 नवंबर

पारण समय
07:48–17:40
9 घं 52 मि · Tithika की परिपाटी

देवउठनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शुक्रवार 16 नवंबर
  • 07:47व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 17 नवंबर
  • 07:48–17:40पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंदेवउठनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में देवउठनी एकादशी शुक्र 16 नवंबर को क्यों है?

देवउठनी एकादशी शुक्र 16 नवंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 19:49 गुरु से 21:58 तक।

एकादशी 21:58 शुक्र पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 16 नवंबर को सूर्योदय पर है, 07:47: शुक्र 16 नवंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 19:49 गुरु पर, उससे (06:11–07:47) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 17 नवंबर, 07:48–17:40 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 16 नवंबर 21:58 से रवि 18 नवंबर 00:24 तक है; हरिवासर 04:35 पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 17 नवंबर को सूर्योदय (07:48) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:40) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:47 तक, करते हैं।

नियम

कार्तिक शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।