Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में देवउठनी एकादशी 2027 पारण समय 07:41–08:37, गुरु 11 नवंबर
व्रत · समय UTC+4 में · इसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं
Sevan में देवउठनी एकादशी 2027 कब है?
पारण का समय: व्रत कब खोलें?
गुरुवार 11 नवंबर
देवउठनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
- बुधवार 10 नवंबर
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07:39व्रत आरंभसूर्योदय पर
- गुरुवार 11 नवंबर
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07:41–08:37पारण समयव्रत खोलने का समय
कथा, पूजा विधि और व्रत के नियम
हर शहर के लिए एक ही, देवउठनी एकादशी 2027 के पेज पर:
Sevan में देवउठनी एकादशी बुध 10 नवंबर को क्यों है?
देवउठनी एकादशी बुध 10 नवंबर को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।
दशमी 06:05 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:05 से 07:41 बुध तक।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:05 मंगल से 07:41 तक।
द्वादशी: 07:41 बुध से 08:37 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, मंगल 9 नवंबर को 07:38 और बुध 10 नवंबर को 07:39। एकादशी (मंगल 9 नवंबर 06:05 से बुध 10 नवंबर 07:41 तक) और द्वादशी (बुध 10 नवंबर 07:41 से गुरु 11 नवंबर 08:37 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: बुध 10 नवंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: मंगल 9 नवंबर को दशमी 06:05 तक है, उसके भीतर (06:02–07:38); बुध 10 नवंबर को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · गुरु 11 नवंबर, 07:41–08:37
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 10 नवंबर 07:41 से गुरु 11 नवंबर 08:37 तक है; हरिवासर 13:55 बुध पर पूरा होता है। इसलिए पारण गुरु 11 नवंबर को सूर्योदय (07:41) से होता है।
नियम
कार्तिक शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।