tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पापांकुशा एकादशी 1960 शुक्र 30 सितंबर या शनि 1 अक्टूबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में पापांकुशा एकादशी 1960 कब है?

स्मार्त

शुक्रवार 30 सितंबर

वैष्णव

शनिवार 1 अक्टूबर

आश्विन शुक्ल एकादशी

Ipameri में शुक्र 30 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · शनिवार 1 अक्टूबर

पारण समय
07:48–18:10
10 घं 22 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · रविवार 2 अक्टूबर

पारण समय
05:54–18:10
12 घं 17 मि · Tithika की परिपाटी

पापांकुशा एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • शुक्रवार 30 सितंबर
  • 05:55व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 1 अक्टूबर
  • 07:48–18:10पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • शनिवार 1 अक्टूबर
  • 05:54व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 2 अक्टूबर
  • 05:54–18:10पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपापांकुशा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में पापांकुशा एकादशी शुक्र 30 सितंबर या शनि 1 अक्टूबर को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में पापांकुशा एकादशी शुक्र 30 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव शनि 1 अक्टूबर को व्रत रखते हैं।

दशमी 04:34 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:34 से 02:20 शनि तक।

एकादशी 02:20 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 04:34 शुक्र से 02:20 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 30 सितंबर को सूर्योदय पर है, 05:55: शुक्र 30 सितंबर।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शुक्र 30 सितंबर को दशमी 04:34 तक है, अरुणोदय (04:19–05:55) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 02:20 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव शनि 1 अक्टूबर को व्रत रखते हैं: शनि 1 अक्टूबर।

व्रत का पारण

स्मार्त · शनि 1 अक्टूबर, 07:48–18:10 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 1 अक्टूबर 02:20 से रवि 2 अक्टूबर 00:12 तक है; हरिवासर 07:48 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:10) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:21 तक, करते हैं।

वैष्णव · रवि 2 अक्टूबर, 05:54–18:10 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी रवि 2 अक्टूबर को 00:12 पर, रात में, अरुणोदय (04:18) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:54) से सूर्यास्त (18:10) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

आश्विन शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।