tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पापांकुशा एकादशी 1961 गुरु 19 अक्टूबर या शुक्र 20 अक्टूबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में पापांकुशा एकादशी 1961 कब है?

स्मार्त

गुरुवार 19 अक्टूबर

वैष्णव

शुक्रवार 20 अक्टूबर

आश्विन शुक्ल एकादशी

Ipameri में गुरु 19 अक्टूबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · शुक्रवार 20 अक्टूबर

पारण समय
10:54–18:14
7 घं 20 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · शनिवार 21 अक्टूबर

पारण समय
05:40–18:15
12 घं 35 मि · Tithika की परिपाटी

पापांकुशा एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • गुरुवार 19 अक्टूबर
  • 05:41व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 20 अक्टूबर
  • 10:54–18:14पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • शुक्रवार 20 अक्टूबर
  • 05:40व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 21 अक्टूबर
  • 05:40–18:15पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपापांकुशा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में पापांकुशा एकादशी गुरु 19 अक्टूबर या शुक्र 20 अक्टूबर को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में पापांकुशा एकादशी गुरु 19 अक्टूबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव शुक्र 20 अक्टूबर को व्रत रखते हैं।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 08:13 से।

अरुणोदय में एकादशी केवल 05:36 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 08:13 गुरु से 05:36 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह गुरु 19 अक्टूबर को 08:13 पर, उस सूर्योदय (05:41) के बाद, लगती है और शुक्र 20 अक्टूबर को 05:36 पर, अगले सूर्योदय (05:40 शुक्र) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: गुरु 19 अक्टूबर।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। गुरु 19 अक्टूबर को अरुणोदय (04:05–05:41) में दशमी है। शुक्र 20 अक्टूबर को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 05:36 तक, फिर द्वादशी): शुक्र 20 अक्टूबर।

व्रत का पारण

स्मार्त · शुक्र 20 अक्टूबर, 10:54–18:14 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 20 अक्टूबर 05:36 से शनि 21 अक्टूबर 02:48 तक है; हरिवासर 10:54 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:14) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:11 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · शनि 21 अक्टूबर, 05:40–18:15 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी शनि 21 अक्टूबर को 02:48 पर, रात में, अरुणोदय (04:04) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:40) से सूर्यास्त (18:15) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

आश्विन शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।