tithika
English

Pāthardi, महाराष्ट्र में अजा एकादशी 2028 बुध 16 अगस्त या गुरु 17 अगस्त

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में अजा एकादशी 2028 कब है?

स्मार्त

बुधवार 16 अगस्त

वैष्णव

गुरुवार 17 अगस्त

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

Pāthardi में बुध 16 अगस्त का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · गुरुवार 17 अगस्त

पारण समय
09:18–18:55
9 घं 37 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · शुक्रवार 18 अगस्त

पारण समय
06:10–18:54
12 घं 44 मि · Tithika की परिपाटी

अजा एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • बुधवार 16 अगस्त
  • 06:10व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 17 अगस्त
  • 09:18–18:55पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • गुरुवार 17 अगस्त
  • 06:10व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 18 अगस्त
  • 06:10–18:54पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअजा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में अजा एकादशी बुध 16 अगस्त या गुरु 17 अगस्त को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में अजा एकादशी बुध 16 अगस्त को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव गुरु 17 अगस्त को व्रत रखते हैं।

दशमी 05:12 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:12 से 03:49 गुरु तक।

एकादशी 03:49 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:12 बुध से 03:49 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 16 अगस्त को सूर्योदय पर है, 06:10: बुध 16 अगस्त।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। बुध 16 अगस्त को दशमी 05:12 तक है, अरुणोदय (04:34–06:10) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 03:49 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव गुरु 17 अगस्त को व्रत रखते हैं: गुरु 17 अगस्त।

व्रत का पारण

स्मार्त · गुरु 17 अगस्त, 09:18–18:55 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 17 अगस्त 03:49 से शुक्र 18 अगस्त 01:43 तक है; हरिवासर 09:18 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:55) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:43 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · शुक्र 18 अगस्त, 06:10–18:54 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी शुक्र 18 अगस्त को 01:43 पर, रात में, अरुणोदय (04:34) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:10) से सूर्यास्त (18:54) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।