प्रदोष व्रत 2026 तेहरान, ईरान
समय UTC+3:30 में
तेहरान में अगला प्रदोष व्रत कब है?
शुक्रवार 6 नवंबर
प्रदोष व्रत शुक्र 6 नवंबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।
जनवरी 2026 में प्रदोष व्रत
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गुरु117:01–19:52प्रदोष पूजा मुहूर्त
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शुक्र1617:15–20:02प्रदोष पूजा मुहूर्त
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शुक्र3017:29–20:12प्रदोष पूजा मुहूर्त
फ़रवरी 2026 में प्रदोष व्रत
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शनि1417:44–20:22प्रदोष पूजा मुहूर्त
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शनि2817:58–20:29प्रदोष पूजा मुहूर्त
मार्च 2026 में प्रदोष व्रत
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सोम1618:12–20:36प्रदोष पूजा मुहूर्त
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सोम3018:24–20:41प्रदोष पूजा मुहूर्त
अप्रैल 2026 में प्रदोष व्रत
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बुध1518:37–20:48प्रदोष पूजा मुहूर्त
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मंगल2818:48–20:53प्रदोष पूजा मुहूर्त
मई 2026 में प्रदोष व्रत
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गुरु1419:01–21:01प्रदोष पूजा मुहूर्त
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गुरु2819:12–21:07प्रदोष पूजा मुहूर्त
जून 2026 में प्रदोष व्रत
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शुक्र1219:20–21:14प्रदोष पूजा मुहूर्त
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शनि2719:24–21:17प्रदोष पूजा मुहूर्त
जुलाई 2026 में प्रदोष व्रत
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रवि1219:21–21:17प्रदोष पूजा मुहूर्त
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रवि2619:13–21:12प्रदोष पूजा मुहूर्त
अगस्त 2026 में प्रदोष व्रत
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सोम1018:59–21:03प्रदोष पूजा मुहूर्त
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मंगल2518:41–20:51प्रदोष पूजा मुहूर्त
सितंबर 2026 में प्रदोष व्रत
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मंगल818:22–20:38प्रदोष पूजा मुहूर्त
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गुरु2417:58–20:21प्रदोष पूजा मुहूर्त
अक्टूबर 2026 में प्रदोष व्रत
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गुरु817:38–20:08प्रदोष पूजा मुहूर्त
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शुक्र2317:19–19:55प्रदोष पूजा मुहूर्त
नवंबर 2026 में प्रदोष व्रत
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शुक्र617:04–19:46प्रदोष पूजा मुहूर्त
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रवि2216:53–19:40प्रदोष पूजा मुहूर्त
दिसंबर 2026 में प्रदोष व्रत
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रवि616:50–19:40प्रदोष पूजा मुहूर्त
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सोम2116:54–19:45प्रदोष पूजा मुहूर्त
प्रदोष व्रत इन तारीख़ों पर क्यों है?
अगली बार, शुक्र 6 नवंबर, तेहरान में
प्रदोष व्रत शुक्र 6 नवंबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।
पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी, 17:04–19:46। त्रयोदशी: 08:31 से 08:48 शनि तक।
त्रयोदशी 08:48 पर समाप्त; प्रदोष काल में चतुर्दशी।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+3:30)। पट्टी: तिथि। खाना: प्रदोष काल। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात।
प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी शुक्र 6 नवंबर को 08:31 से शनि 7 नवंबर को 08:48 तक है, इसलिए केवल शुक्रवार का प्रदोष काल (17:04–19:46) उसके भीतर है। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
नियम
हर शुक्ल और कृष्ण त्रयोदशी
प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त।
- स्मार्त
- वह शाम जिसके प्रदोष काल में त्रयोदशी हो: Tithika की परिपाटी, क्योंकि कोई ग्रंथ समय नहीं बताता।
- वैष्णव
- स्मार्त वाला दिन।