प्रदोष व्रत 2026 Sagara, शिज़ुओका प्रांत, जापान
समय JST में
Sagara में अगला प्रदोष व्रत कब है?
शुक्रवार 6 नवंबर
प्रदोष व्रत शुक्र 6 नवंबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।
जनवरी 2026 में प्रदोष व्रत
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गुरु116:46–19:36प्रदोष पूजा मुहूर्त
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शुक्र1617:00–19:46प्रदोष पूजा मुहूर्त
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शुक्र3017:13–19:56प्रदोष पूजा मुहूर्त
फ़रवरी 2026 में प्रदोष व्रत
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रवि1517:29–20:06प्रदोष पूजा मुहूर्त
मार्च 2026 में प्रदोष व्रत
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रवि117:42–20:13प्रदोष पूजा मुहूर्त
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सोम1617:55–20:19प्रदोष पूजा मुहूर्त
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सोम3018:06–20:24प्रदोष पूजा मुहूर्त
अप्रैल 2026 में प्रदोष व्रत
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बुध1518:18–20:30प्रदोष पूजा मुहूर्त
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बुध2918:30–20:35प्रदोष पूजा मुहूर्त
मई 2026 में प्रदोष व्रत
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गुरु1418:42–20:42प्रदोष पूजा मुहूर्त
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गुरु2818:52–20:49प्रदोष पूजा मुहूर्त
जून 2026 में प्रदोष व्रत
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शनि1319:01–20:55प्रदोष पूजा मुहूर्त
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शनि2719:04–20:58प्रदोष पूजा मुहूर्त
जुलाई 2026 में प्रदोष व्रत
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रवि1219:02–20:58प्रदोष पूजा मुहूर्त
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रवि2618:54–20:54प्रदोष पूजा मुहूर्त
अगस्त 2026 में प्रदोष व्रत
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सोम1018:41–20:45प्रदोष पूजा मुहूर्त
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मंगल2518:23–20:33प्रदोष पूजा मुहूर्त
सितंबर 2026 में प्रदोष व्रत
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मंगल818:04–20:20प्रदोष पूजा मुहूर्त
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गुरु2417:41–20:04प्रदोष पूजा मुहूर्त
अक्टूबर 2026 में प्रदोष व्रत
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गुरु817:22–19:51प्रदोष पूजा मुहूर्त
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शुक्र2317:03–19:38प्रदोष पूजा मुहूर्त
नवंबर 2026 में प्रदोष व्रत
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शुक्र616:49–19:29प्रदोष पूजा मुहूर्त
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रवि2216:38–19:24प्रदोष पूजा मुहूर्त
दिसंबर 2026 में प्रदोष व्रत
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रवि616:36–19:24प्रदोष पूजा मुहूर्त
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मंगल2216:40–19:30प्रदोष पूजा मुहूर्त
प्रदोष व्रत इन तारीख़ों पर क्यों है?
अगली बार, शुक्र 6 नवंबर, Sagara में
प्रदोष व्रत शुक्र 6 नवंबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।
पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी, 16:49–19:29। त्रयोदशी: 14:01 से 14:18 शनि तक।
त्रयोदशी 14:18 पर समाप्त; प्रदोष काल में चतुर्दशी। त्रयोदशी: 14:01 शुक्र से 14:18 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+9)। पट्टी: तिथि। खाना: प्रदोष काल। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात।
प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी शुक्र 6 नवंबर को 14:01 से शनि 7 नवंबर को 14:18 तक है, इसलिए केवल शुक्रवार का प्रदोष काल (16:49–19:29) उसके भीतर है। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
नियम
हर शुक्ल और कृष्ण त्रयोदशी
प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त।
- स्मार्त
- वह शाम जिसके प्रदोष काल में त्रयोदशी हो: Tithika की परिपाटी, क्योंकि कोई ग्रंथ समय नहीं बताता।
- वैष्णव
- स्मार्त वाला दिन।