एकादशी 2026 Same, किलीमंजारो प्रदेश, तंजा़निया
समय EAT में
Same में अगली एकादशी कब है?
स्मार्त · शनिवार 21 नवंबर
वैष्णव · रविवार 22 नवंबर
स्मार्त परंपरा में देवउठनी एकादशी शुक्र 20 नवंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव शनि 21 नवंबर को व्रत रखते हैं।
जनवरी 2026 में एकादशी
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बुध14षटतिला एकादशी
पारण 06:28–17:47 गुरु
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गुरु29जया एकादशी
पारण 06:33–08:39 शुक्र
फ़रवरी 2026 में एकादशी
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शुक्र13विजया एकादशी
पारण 06:36–13:32 शनि
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शुक्र27आमलकी एकादशी
पारण 06:36–18:13 शनि
मार्च 2026 में एकादशी
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रवि15पापमोचनी एकादशी
पारण 06:34–07:11 सोम
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शनि28
अप्रैल 2026 में एकादशी
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सोम13वरूथिनी एकादशी
पारण 06:28–18:30 मंगल
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सोम27मोहिनी एकादशी
पारण 06:27–16:22 मंगल
मई 2026 में एकादशी
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बुध13अपरा एकादशी
पारण 06:27–08:51 गुरु
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मंगल26पद्मिनी एकादशी
पारण 10:16–18:23 बुध
जून 2026 में एकादशी
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गुरु11परमा एकादशी
पारण 06:32–17:07 शुक्र
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गुरु25निर्जला एकादशी
पारण 06:35–18:28 शुक्र
जुलाई 2026 में एकादशी
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शुक्र10
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शनि25देवशयनी एकादशी
पारण 06:38–11:28 रवि
अगस्त 2026 में एकादशी
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रवि9कामिका एकादशी
पारण 04:59–05:31 सोम
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रवि23श्रावण पुत्रदा एकादशी
पारण 08:19–18:31 सोम
सितंबर 2026 में एकादशी
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सोम7अजा एकादशी
पारण 06:25–12:13 मंगल
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मंगल22पार्श्व एकादशी
पारण 06:18–18:24 बुध
अक्टूबर 2026 में एकादशी
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मंगल6इंदिरा एकादशी
पारण 06:12–18:21 बुध
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गुरु22पापांकुशा एकादशी
पारण 06:06–12:06 शुक्र
नवंबर 2026 में एकादशी
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गुरु5रमा एकादशी
पारण 06:04–08:01 शुक्र
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शुक्र20
दिसंबर 2026 में एकादशी
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शुक्र4उत्पन्ना एकादशी
पारण 06:09–18:30 शनि
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रवि20मोक्षदा एकादशी
पारण 06:16–15:06 सोम
हर शहर के लिए एक ही, एकादशी 2026 के पेज पर:
एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
अगली बार, शुक्र 20 नवंबर, Same में
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में देवउठनी एकादशी शुक्र 20 नवंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव शनि 21 नवंबर को व्रत रखते हैं।
दशमी 04:46 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:46 से 04:02 शनि तक।
एकादशी 04:02 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 04:46 शुक्र से 04:02 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 20 नवंबर को सूर्योदय पर है, 06:05: शुक्र 20 नवंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शुक्र 20 नवंबर को दशमी 04:46 तक है, अरुणोदय (04:29–06:05) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 04:02 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव शनि 21 नवंबर को व्रत रखते हैं: शनि 21 नवंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · शनि 21 नवंबर, 09:38–18:24 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 21 नवंबर 04:02 से रवि 22 नवंबर 02:27 तक है; हरिवासर 09:38 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:24) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:33 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · रवि 22 नवंबर, 06:05–18:24 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी रवि 22 नवंबर को 02:27 पर, रात में, अरुणोदय (04:29) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:05) से सूर्यास्त (18:24) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
कार्तिक शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।