सोफिया, बुल्गारिया का पंचांग सोम 23 जनवरी 2012
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय EET में
त्योहार
मौनी अमावस्या
मौनी अमावस्या सोम 23 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है। सोम 23 जनवरी क्यों?
मौनी अमावस्या: सोफिया में हर तारीख़व्रत
अमावस्या
अमावस्या सोम 23 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है। सोम 23 जनवरी क्यों?
अमावस्या: सोफिया में हर तारीख़23 जनवरी का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, सोम 23 जनवरी
- 05:54–06:52ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 07:49 से
- 07:49–09:02अमृत चौघड़िया
- 10:14–11:26शुभ चौघड़िया
- 12:38–12:57अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
- 15:31–16:15लाभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 16:15–17:27अमृत चौघड़िया
- सूर्यास्त 17:27 के बाद
- 22:50–00:38 मंगललाभ चौघड़िया
-
01:36–03:12 मंगलअमृत कालश्रवण में
- 02:26–04:13 मंगलशुभ चौघड़िया
- 04:13–06:01 मंगलअमृत चौघड़िया
- 05:54–06:51 मंगलअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 07:49–09:02अमृतशुभ
- 09:02–10:14कालअशुभ
- 10:14–11:26शुभ
- 11:26–12:38रोगअशुभ
- 12:38–13:50उद्वेगअशुभ
- 13:50–15:03चरसामान्य
- 15:03–16:15लाभशुभ
- 16:15–17:27अमृतशुभ
रात का चौघड़िया
- 17:27–19:15चरसामान्य
- 19:15–21:02रोगअशुभ
- 21:02–22:50कालअशुभ
- 22:50–00:38 मंगललाभशुभ
- 00:38–02:26 मंगलउद्वेगअशुभ
- 02:26–04:13 मंगलशुभ
- 04:13–06:01 मंगलअमृतशुभ
- 06:01–07:49 मंगलचरसामान्य
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, सोम 23 जनवरी: ब्रह्म मुहूर्त, 05:54–06:52, शुभ
- अमृत, शुभ, 07:49–09:02
- काल, अशुभ, 09:02–10:14
- शुभ, 10:14–11:26
- रोग, अशुभ, 11:26–12:38
- उद्वेग, अशुभ, 12:38–13:50
- चर, सामान्य, 13:50–15:03
- लाभ, शुभ, 15:03–16:15
- अमृत, शुभ, 16:15–17:27
- चर, सामान्य, 17:27–19:15
- रोग, अशुभ, 19:15–21:02
- काल, अशुभ, 21:02–22:50
- लाभ, शुभ, 22:50–00:38 मंगल
- उद्वेग, अशुभ, 00:38–02:26 मंगल
- शुभ, 02:26–04:13 मंगल
- अमृत, शुभ, 04:13–06:01 मंगल
- चर, सामान्य, 06:01–07:49 मंगल
- राहु काल, 09:02–10:14, अशुभ
- यमगण्ड, 11:26–12:38, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:19–12:57, शुभ
- दुर्मुहूर्त, 12:57–13:36, अशुभ
- गुलिक काल, 13:50–15:03, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 14:53–15:31, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:54–06:51 मंगल
हर मान कैसे निकलता है
सोफिया में मौनी अमावस्या सोम 23 जनवरी को क्यों है?
मौनी अमावस्या सोम 23 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है।
मौनी अमावस्या सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। अमावस्या रवि 22 जनवरी को 10:49 से सोम 23 जनवरी को 09:39 तक है, इसलिए वह केवल सोम 23 जनवरी के सूर्योदय (07:49) पर है। मौनी अमावस्या का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
सोफिया में अमावस्या सोम 23 जनवरी को क्यों है?
अमावस्या सोम 23 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है।
अमावस्या सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। अमावस्या रवि 22 जनवरी को 10:49 से सोम 23 जनवरी को 09:39 तक है, इसलिए वह केवल सोम 23 जनवरी के सूर्योदय (07:49) पर है। अमावस्या का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
सोम 23 जनवरी को कौन सी तिथि है? कृष्ण अमावस्या
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 359.1° आगे था: कृष्ण अमावस्या।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 348°–360° तीसवीं है, कृष्ण अमावस्या। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 07:49। चतुर्दशी उससे पहले 10:49 रवि पर समाप्त हुई। अमावस्या 09:39 को समाप्त होगी, जब बढ़त 360° होगी। बढ़त 9 जनवरी की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
सोम 23 जनवरी को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:54–06:52
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:54–06:52।
रवि 22 जनवरी की रात सूर्यास्त 17:26 रवि से सूर्योदय 07:49 तक थी, 14 घं 23 मि। इसे 57 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
सोम 23 जनवरी को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:19–12:57
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:19–12:57।
सोम 23 जनवरी को दुर्मुहूर्त कब है? 12:57–13:36
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से नौवाँ और बारहवाँ है: 12:57–13:36 और 14:53–15:31।
सोम 23 जनवरी को दुर्मुहूर्त कब है? 14:53–15:31
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से नौवाँ और बारहवाँ है: 12:57–13:36 और 14:53–15:31।
यहाँ दिन, 07:49 से 17:27, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 38 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। सोमवार को दुर्मुहूर्त नौवाँ और बारहवाँ है, 12:57–13:36 और 14:53–15:31।
सोम 23 जनवरी का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
07:49–09:02 अमृत है, जिसके स्वामी चंद्र हैं, सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 07:49 से 17:27, 1 घं 12 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 17:27 से 07:49 मंगल, 1 घं 47 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
सोम 23 जनवरी को राहुकाल कब है? 09:02–10:14
राहु काल सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 09:02–10:14।
सोम 23 जनवरी को यमगंड कब है? 11:26–12:38
यमगण्ड सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 11:26–12:38।
सोम 23 जनवरी को गुलिक काल कब है? 13:50–15:03
गुलिक काल सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:50–15:03।
यहाँ दिन 07:49 से 17:27 तक है, 9 घं 38 मि। इसे 1 घं 12 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: सोमवार को राहु काल दूसरा भाग है, यमगण्ड चौथा और गुलिक काल छठा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
सोम 23 जनवरी को सूर्योदय कितने बजे है? 07:49
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:49, सूर्यास्त 17:27, 9 घं 38 मि का दिन।
सोम 23 जनवरी को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:27
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:49, सूर्यास्त 17:27, 9 घं 38 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 9 घं 38 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 14 घं 22 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 9 घं 38 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 14 घं 22 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सोम 23 जनवरी को कौन सा नक्षत्र है? उत्तराषाढा
सूर्योदय पर चंद्रमा 277.6° पर था: उत्तराषाढा, पद 4।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। उत्तराषाढा 266°40′–280°00′ तक है; चंद्रमा 276°40′ पर उसके पद 4 में आया। वह 12:01 को निकलेगा, श्रवण में।
सोम 23 जनवरी को कौन सा योग है? वज्र
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 556.2° थे, एक चक्कर और 196.2°: वज्र।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 278.6° + 277.6° = 556.2°, एक पूरा चक्कर और 196.2°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 186°40′–200°00′ पंद्रहवाँ है, वज्र। यह 14:04 को समाप्त होता है, फिर सिद्धि।
सोम 23 जनवरी को कौन सा करण है? नाग
सूर्योदय पर बढ़त 359.1° थी: अमावस्या का दूसरा आधा, नाग।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए अमावस्या का पहला आधा चतुष्पाद है और दूसरा नाग। चतुष्पाद 22:11 रवि पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 354° हुई; नाग 09:39 तक है।
सोम 23 जनवरी को कौन सा वार है, और कब से? सोमवार
यह दिन सोमवार को सूर्योदय, 07:49, पर शुरू हुआ: सोमवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 07:49 से 07:49 मंगल तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी सोमवार के हैं।
सोम 23 जनवरी को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? पौष
यह मास 24 दिसंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य धनु में था: पौष।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: धनु से पौष। सूर्य 14 जनवरी को, मास के भीतर, मकर में जाता है। अगली अमावस्या, 23 जनवरी, उसे मकर में पाती है और माघ शुरू करती है।
सोम 23 जनवरी को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? माघ
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष माघ का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 23 जनवरी की अमावस्या, सूर्य मकर में, माघ शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ माघ है, और अमान्त गणना में पौष।
सोम 23 जनवरी को कौन सा संवत है? विक्रम 2068 · शक 1933
विक्रम संवत 2068 3 अप्रैल 2011 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 3 अप्रैल 2011, 17:32 रवि। तब से सूर्य तारों के बीच 289.1° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2068 गिनता है; शक संवत 1933।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
सोम 23 जनवरी को चंद्रास्त कितने बजे है? 17:56
चंद्रमा यहाँ 17:56 पर अस्त होता है।
चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच उदय नहीं होता।
चंद्रमा 17:56 पर, रात में, अस्त होता है और अगले सूर्योदय से पहले उदय नहीं होता।