Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग रवि 23 मार्च 2031
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+4 में
त्योहार
चैत्र नवरात्रि · घटस्थापना
चैत्र नवरात्रि · घटस्थापना रवि 23 मार्च को है: उस सुबह प्रतिपदा प्रातःकाल का सोम 24 मार्च से अधिक भाग घेरती है। रवि 23 मार्च क्यों?
चैत्र नवरात्रि: Sevan में हर तारीख़व्रत
अमावस्या
अमावस्या रवि 23 मार्च को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है। रवि 23 मार्च क्यों?
अमावस्या: Sevan में हर तारीख़23 मार्च का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, रवि 23 मार्च
- 05:25–06:12ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:59 से
- 10:03–11:35लाभ चौघड़िया
- 11:35–13:07अमृत चौघड़िया
- 12:42–13:07अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
- 14:38–16:10शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 19:14 के बाद
- 19:14–20:42शुभ चौघड़िया
-
19:14–20:04अमृत कालराहु काल छोड़कर · उत्तर भाद्रपद में
- 20:42–22:10अमृत चौघड़िया
- 02:34–04:01 सोमलाभ चौघड़िया
- 05:29–06:57 सोमशुभ चौघड़िया
- 05:23–06:10 सोमअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:59–08:31उद्वेगअशुभ
- 08:31–10:03चरसामान्य
- 10:03–11:35लाभशुभ
- 11:35–13:07अमृतशुभ
- 13:07–14:38कालअशुभ
- 14:38–16:10शुभ
- 16:10–17:42रोगअशुभ
- 17:42–19:14उद्वेगअशुभ
रात का चौघड़िया
- 19:14–20:42शुभ
- 20:42–22:10अमृतशुभ
- 22:10–23:38चरसामान्य
- 23:38–01:06 सोमरोगअशुभ
- 01:06–02:34 सोमकालअशुभ
- 02:34–04:01 सोमलाभशुभ
- 04:01–05:29 सोमउद्वेगअशुभ
- 05:29–06:57 सोमशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, रवि 23 मार्च: ब्रह्म मुहूर्त, 05:25–06:12, शुभ
- उद्वेग, अशुभ, 06:59–08:31
- चर, सामान्य, 08:31–10:03
- लाभ, शुभ, 10:03–11:35
- अमृत, शुभ, 11:35–13:07
- काल, अशुभ, 13:07–14:38
- शुभ, 14:38–16:10
- रोग, अशुभ, 16:10–17:42
- उद्वेग, अशुभ, 17:42–19:14
- शुभ, 19:14–20:42
- अमृत, शुभ, 20:42–22:10
- चर, सामान्य, 22:10–23:38
- रोग, अशुभ, 23:38–01:06 सोम
- काल, अशुभ, 01:06–02:34 सोम
- लाभ, शुभ, 02:34–04:01 सोम
- उद्वेग, अशुभ, 04:01–05:29 सोम
- शुभ, 05:29–06:57 सोम
- अभिजीत मुहूर्त, 12:42–13:31, शुभ
- यमगण्ड, 13:07–14:38, अशुभ
- गुलिक काल, 16:10–17:42, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 17:36–18:25, अशुभ
- राहु काल, 17:42–19:14, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:23–06:10 सोम
हर मान कैसे निकलता है
Sevan में चैत्र नवरात्रि रवि 23 मार्च को क्यों है?
चैत्र नवरात्रि · घटस्थापना रवि 23 मार्च को है: उस सुबह प्रतिपदा प्रातःकाल का सोम 24 मार्च से अधिक भाग घेरती है।
घटस्थापना प्रातःकाल में होती है, दिन का पहला पाँचवाँ भाग। प्रतिपदा रवि 23 मार्च को 07:49 से सोम 24 मार्च को 07:01 तक है, और दोनों सुबह प्रातःकाल को छूती है। निर्णयसिंधु वह सुबह लेता है जिसका प्रातःकाल उसमें अधिक है: रवि 23 मार्च। चैत्र नवरात्रि · घटस्थापना का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रातःकाल Tithika की परिपाटी है।
Sevan में अमावस्या रवि 23 मार्च को क्यों है?
अमावस्या रवि 23 मार्च को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है।
अमावस्या सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। अमावस्या शनि 22 मार्च को 09:07 से रवि 23 मार्च को 07:49 तक है, इसलिए वह केवल रवि 23 मार्च के सूर्योदय (06:59) पर है। अमावस्या का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
रवि 23 मार्च को कौन सी तिथि है? कृष्ण अमावस्या
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 359.6° आगे था: कृष्ण अमावस्या।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 348°–360° तीसवीं है, कृष्ण अमावस्या। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:59। चतुर्दशी उससे पहले 09:07 शनि पर समाप्त हुई। अमावस्या 07:49 को समाप्त होगी, जब बढ़त 360° होगी। बढ़त 9 मार्च की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
रवि 23 मार्च को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:25–06:12
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:25–06:12।
शनि 22 मार्च की रात सूर्यास्त 19:13 शनि से सूर्योदय 06:59 तक थी, 11 घं 46 मि। इसे 47 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
रवि 23 मार्च को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:42–13:31
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:42–13:31।
रवि 23 मार्च को दुर्मुहूर्त कब है? 17:36–18:25
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 17:36–18:25।
यहाँ दिन, 06:59 से 19:14, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 49 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। रविवार को दुर्मुहूर्त चौदहवाँ है, 17:36–18:25।
रवि 23 मार्च का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:59–08:31 उद्वेग है, जिसके स्वामी सूर्य हैं, रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:59 से 19:14, 1 घं 31 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 19:14 से 06:57 सोम, 1 घं 27 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
रवि 23 मार्च को राहुकाल कब है? 17:42–19:14
राहु काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से आठवाँ है: 17:42–19:14।
रवि 23 मार्च को यमगंड कब है? 13:07–14:38
यमगण्ड रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 13:07–14:38।
रवि 23 मार्च को गुलिक काल कब है? 16:10–17:42
गुलिक काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 16:10–17:42।
यहाँ दिन 06:59 से 19:14 तक है, 12 घं 15 मि। इसे 1 घं 31 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: रविवार को राहु काल आठवाँ भाग है, यमगण्ड पाँचवाँ और गुलिक काल सातवाँ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
रवि 23 मार्च को सूर्योदय कितने बजे है? 06:59
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:59, सूर्यास्त 19:14, 12 घं 15 मि का दिन।
रवि 23 मार्च को सूर्यास्त कितने बजे है? 19:14
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:59, सूर्यास्त 19:14, 12 घं 15 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 15 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 43 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 15 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 43 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
रवि 23 मार्च को कौन सा नक्षत्र है? उत्तर भाद्रपद
सूर्योदय पर चंद्रमा 337.6° पर था: उत्तर भाद्रपद, पद 2।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। उत्तर भाद्रपद 333°20′–346°40′ तक है; चंद्रमा 336°40′ पर उसके पद 2 में आया। वह 23:14 को निकलेगा, रेवती में।
रवि 23 मार्च को कौन सा योग है? शुक्ल
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 675.6° थे, एक चक्कर और 315.6°: शुक्ल।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 338° + 337.6° = 675.6°, एक पूरा चक्कर और 315.6°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 306°40′–320°00′ चौबीसवाँ है, शुक्ल। यह 14:21 को समाप्त होता है, फिर ब्रह्म।
रवि 23 मार्च को कौन सा करण है? नाग
सूर्योदय पर बढ़त 359.6° थी: अमावस्या का दूसरा आधा, नाग।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए अमावस्या का पहला आधा चतुष्पाद है और दूसरा नाग। चतुष्पाद 20:24 शनि पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 354° हुई; नाग 07:49 तक है।
रवि 23 मार्च को कौन सा वार है, और कब से? रविवार
यह दिन रविवार को सूर्योदय, 06:59, पर शुरू हुआ: रविवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:59 से 06:57 सोम तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी रविवार के हैं।
रवि 23 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? फाल्गुन
यह मास 21 फ़रवरी की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कुंभ में था: फाल्गुन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कुंभ से फाल्गुन। सूर्य 15 मार्च को, मास के भीतर, मीन में जाता है। अगली अमावस्या, 23 मार्च, उसे मीन में पाती है और चैत्र शुरू करती है।
रवि 23 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? चैत्र
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष चैत्र का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 23 मार्च की अमावस्या, सूर्य मीन में, चैत्र शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ चैत्र है, और अमान्त गणना में फाल्गुन।
रवि 23 मार्च को कौन सा संवत है? विक्रम 2087 · शक 1952
विक्रम संवत 2087 3 अप्रैल 2030 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 3 अप्रैल 2030, 02:02 बुध। तब से सूर्य तारों के बीच 349.1° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2087 गिनता है; शक संवत 1952।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
रवि 23 मार्च को चंद्रास्त कितने बजे है? 19:47
चंद्रमा यहाँ 19:47 पर अस्त होता है।
चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच उदय नहीं होता।
चंद्रमा 19:47 पर, रात में, अस्त होता है और अगले सूर्योदय से पहले उदय नहीं होता।