Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग गुरु 12 अगस्त 2004
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+5 में
व्रत का पारण
परमा एकादशी
12 अगस्त का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 12 अगस्त
- 05:47–06:27ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 07:07 से
- 07:07–08:52शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
-
13:13–15:00अमृत कालआर्द्रा में
- 13:36–14:32अभिजीत मुहूर्त
- 14:04–15:48लाभ चौघड़िया
- 15:48–17:33अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 19:17–21:01शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 21:01 के बाद
- 21:01–22:17अमृत चौघड़िया
- 02:05–03:21 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 04:36–05:52 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 05:52–07:08 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 05:47–06:28 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 07:07–08:52शुभयमगण्ड में
- 08:52–10:36रोगअशुभ
- 10:36–12:20उद्वेगअशुभ
- 12:20–14:04चरसामान्य
- 14:04–15:48लाभशुभ
- 15:48–17:33अमृतराहु काल में
- 17:33–19:17कालअशुभ
- 19:17–21:01शुभ
रात का चौघड़िया
- 21:01–22:17अमृतशुभ
- 22:17–23:33चरसामान्य
- 23:33–00:49 शुक्ररोगअशुभ
- 00:49–02:05 शुक्रकालअशुभ
- 02:05–03:21 शुक्रलाभशुभ
- 03:21–04:36 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 04:36–05:52 शुक्रशुभ
- 05:52–07:08 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 12 अगस्त: ब्रह्म मुहूर्त, 05:47–06:27, शुभ
- शुभ, 07:07–08:52
- रोग, अशुभ, 08:52–10:36
- उद्वेग, अशुभ, 10:36–12:20
- चर, सामान्य, 12:20–14:04
- लाभ, शुभ, 14:04–15:48
- अमृत, शुभ, 15:48–17:33
- काल, अशुभ, 17:33–19:17
- शुभ, 19:17–21:01
- अमृत, शुभ, 21:01–22:17
- चर, सामान्य, 22:17–23:33
- रोग, अशुभ, 23:33–00:49 शुक्र
- काल, अशुभ, 00:49–02:05 शुक्र
- लाभ, शुभ, 02:05–03:21 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 03:21–04:36 शुक्र
- शुभ, 04:36–05:52 शुक्र
- अमृत, शुभ, 05:52–07:08 शुक्र
- यमगण्ड, 07:07–08:52, अशुभ
- गुलिक काल, 10:36–12:20, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 11:45–12:41, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 13:36–14:32, शुभ
- राहु काल, 15:48–17:33, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 17:19–18:14, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:47–06:28 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
गुरु 12 अगस्त को कौन सी तिथि है? कृष्ण द्वादशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 315.6° आगे था: कृष्ण द्वादशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 312°–324° सत्ताईसवीं है, कृष्ण द्वादशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 07:07। एकादशी उससे पहले 23:08 बुध पर समाप्त हुई। द्वादशी 01:28 शुक्र को समाप्त होगी, जब बढ़त 324° होगी। बढ़त 31 जुलाई की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
गुरु 12 अगस्त को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:47–06:27
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:47–06:27।
बुध 11 अगस्त की रात सूर्यास्त 21:02 बुध से सूर्योदय 07:07 तक थी, 10 घं 5 मि। इसे 40 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 12 अगस्त को अभिजीत मुहूर्त कब है? 13:36–14:32
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 13:36–14:32।
गुरु 12 अगस्त को दुर्मुहूर्त कब है? 11:45–12:41
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 11:45–12:41 और 17:19–18:14।
गुरु 12 अगस्त को दुर्मुहूर्त कब है? 17:19–18:14
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 11:45–12:41 और 17:19–18:14।
यहाँ दिन, 07:07 से 21:01, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 55 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 11:45–12:41 और 17:19–18:14।
गुरु 12 अगस्त का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
07:07–08:52 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 07:07 से 21:01, 1 घं 44 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 21:01 से 07:08 शुक्र, 1 घं 15 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 12 अगस्त को राहुकाल कब है? 15:48–17:33
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 15:48–17:33।
गुरु 12 अगस्त को यमगंड कब है? 07:07–08:52
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 07:07–08:52।
गुरु 12 अगस्त को गुलिक काल कब है? 10:36–12:20
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 10:36–12:20।
यहाँ दिन 07:07 से 21:01 तक है, 13 घं 54 मि। इसे 1 घं 44 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 12 अगस्त को सूर्योदय कितने बजे है? 07:07
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:07, सूर्यास्त 21:01, 13 घं 54 मि का दिन।
गुरु 12 अगस्त को सूर्यास्त कितने बजे है? 21:01
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:07, सूर्यास्त 21:01, 13 घं 54 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 13 घं 54 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 10 घं 7 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 13 घं 54 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 10 घं 7 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 12 अगस्त को कौन सा नक्षत्र है? आर्द्रा
सूर्योदय पर चंद्रमा 71.4° पर था: आर्द्रा, पद 2।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। आर्द्रा 66°40′–80°00′ तक है; चंद्रमा 70° पर उसके पद 2 में आया। वह 00:25 शुक्र को निकलेगा, पुनर्वसु में।
गुरु 12 अगस्त को कौन सा योग है? वज्र
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 187.2° थे: वज्र।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 115.8° + 71.4° = 187.2°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 186°40′–200°00′ पंद्रहवाँ है, वज्र। यह 06:57 शुक्र को समाप्त होता है, फिर सिद्धि।
गुरु 12 अगस्त को कौन सा करण है? कौलव
सूर्योदय पर बढ़त 315.6° थी: द्वादशी का पहला आधा, कौलव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए द्वादशी का पहला आधा कौलव है और दूसरा तैतिल। कौलव 12:20 तक है, जब बढ़त 318° होगी; तैतिल 01:28 शुक्र तक।
गुरु 12 अगस्त को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 07:07, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 07:07 से 07:08 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 12 अगस्त को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? श्रावण (अधिक)
17 जुलाई और 16 अगस्त की अमावस्याओं के बीच कोई संक्रांति नहीं: अधिक श्रावण।
सामान्यतः एक मास में एक संक्रांति होती है, सूर्य का नई राशि में प्रवेश। 17 जुलाई 16:23 शनि से 16 अगस्त 06:23 सोम तक सूर्य कर्क में रहा; सिंह में वह अमावस्या के बाद 16 अगस्त 16:18 सोम को गया। बिना संक्रांति का मास अधिक श्रावण है, जो श्रावण से पहले आता है।
गुरु 12 अगस्त को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? श्रावण (अधिक)
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष श्रावण (अधिक) का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 16 अगस्त की अमावस्या, सूर्य कर्क में, श्रावण (अधिक) शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ श्रावण (अधिक) है, और अमान्त गणना में श्रावण (अधिक)।
गुरु 12 अगस्त को कौन सा संवत है? विक्रम 2061 · शक 1926
विक्रम संवत 2061 21 मार्च 2004 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 21 मार्च 2004, 02:41 रवि। तब से सूर्य तारों के बीच 139.1° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2061 गिनता है; शक संवत 1926।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 12 अगस्त को चंद्रोदय कितने बजे है? 04:00 शुक्र
चंद्रमा यहाँ 04:00 शुक्र पर उदय होता है।
गुरु 12 अगस्त को चंद्रास्त कितने बजे है? 19:10
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 19:10 पर अस्त हुआ; वह फिर 04:00 शुक्र पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 19:10 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 04:00 शुक्र पर उदय होगा।