Pāthardi, महाराष्ट्र का पंचांग शनि 13 मई 1972
महाराष्ट्र, भारत
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय IST में
व्रत
अमावस्या
अमावस्या शनि 13 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है। शनि 13 मई क्यों?
अमावस्या: Pāthardi में हर तारीख़13 मई का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शनि 13 मई
- 04:27–05:11ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 05:55 से
- 07:39–09:10शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 11:59–12:51अभिजीत मुहूर्त
- 14:03–15:40लाभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 15:40–17:18अमृत चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:56 के बाद
- 18:56–20:18लाभ चौघड़िया
- 21:40–23:03शुभ चौघड़िया
- 23:03–00:25 रविअमृत चौघड़िया
-
00:50–02:14 रविअमृत कालकृत्तिका में
- 04:32–05:54 रविलाभ चौघड़िया
- 04:26–05:10 रविअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 05:55–07:32कालअशुभ
- 07:32–09:10शुभ
- 09:10–10:48रोगअशुभ
- 10:48–12:25उद्वेगअशुभ
- 12:25–14:03चरसामान्य
- 14:03–15:40लाभयमगण्ड में
- 15:40–17:18अमृतशुभ
- 17:18–18:56कालअशुभ
रात का चौघड़िया
- 18:56–20:18लाभशुभ
- 20:18–21:40उद्वेगअशुभ
- 21:40–23:03शुभ
- 23:03–00:25 रविअमृतशुभ
- 00:25–01:47 रविचरसामान्य
- 01:47–03:10 रविरोगअशुभ
- 03:10–04:32 रविकालअशुभ
- 04:32–05:54 रविलाभशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शनि 13 मई: ब्रह्म मुहूर्त, 04:27–05:11, शुभ
- काल, अशुभ, 05:55–07:32
- शुभ, 07:32–09:10
- रोग, अशुभ, 09:10–10:48
- उद्वेग, अशुभ, 10:48–12:25
- चर, सामान्य, 12:25–14:03
- लाभ, शुभ, 14:03–15:40
- अमृत, शुभ, 15:40–17:18
- काल, अशुभ, 17:18–18:56
- लाभ, शुभ, 18:56–20:18
- उद्वेग, अशुभ, 20:18–21:40
- शुभ, 21:40–23:03
- अमृत, शुभ, 23:03–00:25 रवि
- चर, सामान्य, 00:25–01:47 रवि
- रोग, अशुभ, 01:47–03:10 रवि
- काल, अशुभ, 03:10–04:32 रवि
- लाभ, शुभ, 04:32–05:54 रवि
- गुलिक काल, 05:55–07:32, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 05:55–06:47, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 06:47–07:39, अशुभ
- राहु काल, 09:10–10:48, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:59–12:51, शुभ
- यमगण्ड, 14:03–15:40, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:26–05:10 रवि
हर मान कैसे निकलता है
Pāthardi में अमावस्या शनि 13 मई को क्यों है?
अमावस्या शनि 13 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है।
अमावस्या सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। अमावस्या शुक्र 12 मई को 13:31 से शनि 13 मई को 09:38 तक है, इसलिए वह केवल शनि 13 मई के सूर्योदय (05:55) पर है। अमावस्या का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
शनि 13 मई को कौन सी तिथि है? कृष्ण अमावस्या
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 357.8° आगे था: कृष्ण अमावस्या।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 348°–360° तीसवीं है, कृष्ण अमावस्या। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:55। चतुर्दशी उससे पहले 13:31 शुक्र पर समाप्त हुई। अमावस्या 09:38 को समाप्त होगी, जब बढ़त 360° होगी। बढ़त 28 अप्रैल की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
प्रतिपदा क्षय क्यों है?
प्रतिपदा एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन प्रतिपदा नहीं होता।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। प्रतिपदा 09:38 को शुरू हुई और 05:51 रवि को समाप्त, 05:55 और 05:54 रवि के सूर्योदयों के बीच। शनिवार को अमावस्या है और रविवार को द्वितीया: प्रतिपदा यहाँ क्षय तिथि है।
शनि 13 मई को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:27–05:11
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:27–05:11।
शुक्र 12 मई की रात सूर्यास्त 18:55 शुक्र से सूर्योदय 05:55 तक थी, 11 घं 0 मि। इसे 44 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शनि 13 मई को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:59–12:51
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:59–12:51।
शनि 13 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 05:55–06:47
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 05:55–06:47 और 06:47–07:39।
शनि 13 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 06:47–07:39
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 05:55–06:47 और 06:47–07:39।
यहाँ दिन, 05:55 से 18:56, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 52 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शनिवार को दुर्मुहूर्त पहला और दूसरा है, 05:55–06:47 और 06:47–07:39।
शनि 13 मई का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
05:55–07:32 काल है, जिसके स्वामी शनि हैं, शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 05:55 से 18:56, 1 घं 37 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:56 से 05:54 रवि, 1 घं 22 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शनि 13 मई को राहुकाल कब है? 09:10–10:48
राहु काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:10–10:48।
शनि 13 मई को यमगंड कब है? 14:03–15:40
यमगण्ड शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 14:03–15:40।
शनि 13 मई को गुलिक काल कब है? 05:55–07:32
गुलिक काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 05:55–07:32।
यहाँ दिन 05:55 से 18:56 तक है, 13 घं 1 मि। इसे 1 घं 37 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शनिवार को राहु काल तीसरा भाग है, यमगण्ड छठा और गुलिक काल पहला।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शनि 13 मई को सूर्योदय कितने बजे है? 05:55
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:55, सूर्यास्त 18:56, 13 घं 1 मि का दिन।
शनि 13 मई को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:56
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:55, सूर्यास्त 18:56, 13 घं 1 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 13 घं 1 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 10 घं 58 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 13 घं 1 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 10 घं 58 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शनि 13 मई को कौन सा नक्षत्र है? भरणी
सूर्योदय पर चंद्रमा 26.6° पर था: भरणी, पद 4।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। भरणी 13°20′–26°40′ तक है; चंद्रमा 23°20′ पर उसके पद 4 में आया। वह 05:55 को निकलेगा, कृत्तिका में।
शनि 13 मई को कौन सा योग है? शोभन
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 55.5° थे: शोभन।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 28.9° + 26.6° = 55.5°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 53°20′–66°40′ पाँचवाँ है, शोभन। यह 22:24 को समाप्त होता है, फिर अतिगण्ड।
शनि 13 मई को कौन सा करण है? नाग
सूर्योदय पर बढ़त 357.8° थी: अमावस्या का दूसरा आधा, नाग।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए अमावस्या का पहला आधा चतुष्पाद है और दूसरा नाग। चतुष्पाद 23:34 शुक्र पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 354° हुई; नाग 09:38 तक है।
शनि 13 मई को कौन सा वार है, और कब से? शनिवार
यह दिन शनिवार को सूर्योदय, 05:55, पर शुरू हुआ: शनिवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:55 से 05:54 रवि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शनिवार के हैं।
शनि 13 मई को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? वैशाख (अधिक)
14 अप्रैल और 13 मई की अमावस्याओं के बीच कोई संक्रांति नहीं: अधिक वैशाख।
सामान्यतः एक मास में एक संक्रांति होती है, सूर्य का नई राशि में प्रवेश। 14 अप्रैल 02:00 शुक्र से 13 मई 09:38 तक सूर्य मेष में रहा; वृषभ में वह अमावस्या के बाद 14 मई 09:56 रवि को गया। बिना संक्रांति का मास अधिक वैशाख है, जो वैशाख से पहले आता है।
शनि 13 मई को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? वैशाख (अधिक)
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष वैशाख (अधिक) का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 13 मई की अमावस्या, सूर्य मेष में, वैशाख (अधिक) शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ वैशाख (अधिक) है, और अमान्त गणना में वैशाख (अधिक)।
शनि 13 मई को कौन सा संवत है? विक्रम 2029 · शक 1894
विक्रम संवत 2029 15 मार्च 1972 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 15 मार्च 1972, 17:04 बुध। तब से सूर्य तारों के बीच 57.4° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2029 गिनता है; शक संवत 1894।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शनि 13 मई को चंद्रास्त कितने बजे है? 19:20
चंद्रमा यहाँ 19:20 पर अस्त होता है।
चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच उदय नहीं होता।
चंद्रमा 19:20 पर, रात में, अस्त होता है और अगले सूर्योदय से पहले उदय नहीं होता।