Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल का पंचांग रवि 31 अक्टूबर 2021
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC−3 में
व्रत
रमा एकादशी
स्मार्त परंपरा में रमा एकादशी रवि 31 अक्टूबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव सोम 1 नवंबर को व्रत रखते हैं। रवि 31 अक्टूबर क्यों?
रमा एकादशी: Ipameri में हर तारीख़31 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, रवि 31 अक्टूबर
- 04:04–04:49ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 05:34 से
- 08:45–10:20लाभ चौघड़िया
- 10:20–11:56अमृत चौघड़िया
- 11:31–11:56अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
- 13:32–15:07शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:18 के बाद
- 18:18–19:43शुभ चौघड़िया
- 19:43–21:07अमृत चौघड़िया
-
22:04–23:39अमृत कालपूर्वाफाल्गुनी में
- 01:20–02:45 सोमलाभ चौघड़िया
- 04:09–05:33 सोमशुभ चौघड़िया
- 04:03–04:48 सोमअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 05:34–07:09उद्वेगअशुभ
- 07:09–08:45चरसामान्य
- 08:45–10:20लाभशुभ
- 10:20–11:56अमृतशुभ
- 11:56–13:32कालअशुभ
- 13:32–15:07शुभ
- 15:07–16:43रोगअशुभ
- 16:43–18:18उद्वेगअशुभ
रात का चौघड़िया
- 18:18–19:43शुभ
- 19:43–21:07अमृतशुभ
- 21:07–22:31चरसामान्य
- 22:31–23:56रोगअशुभ
- 23:56–01:20 सोमकालअशुभ
- 01:20–02:45 सोमलाभशुभ
- 02:45–04:09 सोमउद्वेगअशुभ
- 04:09–05:33 सोमशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, रवि 31 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:04–04:49, शुभ
- उद्वेग, अशुभ, 05:34–07:09
- चर, सामान्य, 07:09–08:45
- लाभ, शुभ, 08:45–10:20
- अमृत, शुभ, 10:20–11:56
- काल, अशुभ, 11:56–13:32
- शुभ, 13:32–15:07
- रोग, अशुभ, 15:07–16:43
- उद्वेग, अशुभ, 16:43–18:18
- शुभ, 18:18–19:43
- अमृत, शुभ, 19:43–21:07
- चर, सामान्य, 21:07–22:31
- रोग, अशुभ, 22:31–23:56
- काल, अशुभ, 23:56–01:20 सोम
- लाभ, शुभ, 01:20–02:45 सोम
- उद्वेग, अशुभ, 02:45–04:09 सोम
- शुभ, 04:09–05:33 सोम
- अभिजीत मुहूर्त, 11:31–12:22, शुभ
- यमगण्ड, 11:56–13:32, अशुभ
- गुलिक काल, 15:07–16:43, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 16:36–17:27, अशुभ
- राहु काल, 16:43–18:18, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:03–04:48 सोम
हर मान कैसे निकलता है
Ipameri में रमा एकादशी रवि 31 अक्टूबर को क्यों है?
स्मार्त परंपरा में रमा एकादशी रवि 31 अक्टूबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव सोम 1 नवंबर को व्रत रखते हैं।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह रवि 31 अक्टूबर को 05:57 पर, उस सूर्योदय (05:34) के बाद, लगती है और सोम 1 नवंबर को 04:52 पर, अगले सूर्योदय (05:33 सोम) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: रवि 31 अक्टूबर।
रवि 31 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण दशमी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 299.8° आगे था: कृष्ण दशमी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 288°–300° पच्चीसवीं है, कृष्ण दशमी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:34। नवमी उससे पहले 06:13 शनि पर समाप्त हुई। दशमी 05:57 को समाप्त होगी, जब बढ़त 300° होगी। बढ़त 20 अक्टूबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
एकादशी क्षय क्यों है?
एकादशी एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन एकादशी नहीं होता।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। एकादशी 05:57 को शुरू हुई और 04:52 सोम को समाप्त, 05:34 और 05:33 सोम के सूर्योदयों के बीच। रविवार को दशमी है और सोमवार को द्वादशी: एकादशी यहाँ क्षय तिथि है।
रवि 31 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:04–04:49
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:04–04:49।
शनि 30 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 18:18 शनि से सूर्योदय 05:34 तक थी, 11 घं 16 मि। इसे 45 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
रवि 31 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:31–12:22
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:31–12:22।
रवि 31 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 16:36–17:27
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 16:36–17:27।
यहाँ दिन, 05:34 से 18:18, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 50 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। रविवार को दुर्मुहूर्त चौदहवाँ है, 16:36–17:27।
रवि 31 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
05:34–07:09 उद्वेग है, जिसके स्वामी सूर्य हैं, रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 05:34 से 18:18, 1 घं 35 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:18 से 05:33 सोम, 1 घं 24 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
रवि 31 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 16:43–18:18
राहु काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से आठवाँ है: 16:43–18:18।
रवि 31 अक्टूबर को यमगंड कब है? 11:56–13:32
यमगण्ड रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 11:56–13:32।
रवि 31 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 15:07–16:43
गुलिक काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 15:07–16:43।
यहाँ दिन 05:34 से 18:18 तक है, 12 घं 44 मि। इसे 1 घं 35 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: रविवार को राहु काल आठवाँ भाग है, यमगण्ड पाँचवाँ और गुलिक काल सातवाँ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
रवि 31 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 05:34
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:34, सूर्यास्त 18:18, 12 घं 44 मि का दिन।
रवि 31 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:18
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:34, सूर्यास्त 18:18, 12 घं 44 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 44 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 15 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 44 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 15 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
रवि 31 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? पूर्वाफाल्गुनी
सूर्योदय पर चंद्रमा 133.8° पर था: पूर्वाफाल्गुनी, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। पूर्वाफाल्गुनी 133°20′–146°40′ तक है; चंद्रमा 133°20′ पर उसके पद 1 में आया। वह 04:22 सोम को निकलेगा, उत्तराफाल्गुनी में।
रवि 31 अक्टूबर को कौन सा योग है? ब्रह्म
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 327.8° थे: ब्रह्म।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 194° + 133.8° = 327.8°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 320°00′–333°20′ पच्चीसवाँ है, ब्रह्म। यह 14:50 को समाप्त होता है, फिर इन्द्र।
रवि 31 अक्टूबर को कौन सा करण है? विष्टि
सूर्योदय पर बढ़त 299.8° थी: दशमी का दूसरा आधा, विष्टि।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए दशमी का पहला आधा वणिज है और दूसरा विष्टि। वणिज 18:12 शनि पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 294° हुई; विष्टि 05:57 तक है।
रवि 31 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? रविवार
यह दिन रविवार को सूर्योदय, 05:34, पर शुरू हुआ: रविवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:34 से 05:33 सोम तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी रविवार के हैं।
रवि 31 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आश्विन
यह मास 6 अक्टूबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कन्या में था: आश्विन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कन्या से आश्विन। सूर्य 17 अक्टूबर को, मास के भीतर, तुला में जाता है। अगली अमावस्या, 4 नवंबर, उसे तुला में पाती है और कार्तिक शुरू करती है।
रवि 31 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? कार्तिक
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष कार्तिक का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 4 नवंबर की अमावस्या, सूर्य तुला में, कार्तिक शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ कार्तिक है, और अमान्त गणना में आश्विन।
रवि 31 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2078 · शक 1943
विक्रम संवत 2078 11 अप्रैल 2021 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 11 अप्रैल 2021, 23:30 रवि। तब से सूर्य तारों के बीच 195.7° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2078 गिनता है; शक संवत 1943।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
रवि 31 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 03:13 सोम
चंद्रमा यहाँ 03:13 सोम पर उदय होता है।
रवि 31 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 14:21
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 14:21 पर अस्त हुआ; वह फिर 03:13 सोम पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 14:21 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 03:13 सोम पर उदय होगा।