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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में योगिनी एकादशी 2021 पारण समय 05:36⁠–⁠20:33, मंगल 6 जुलाई

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में योगिनी एकादशी 2021 कब है?

सोमवार 5 जुलाई

आषाढ़ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में सोम 5 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

मंगलवार 6 जुलाई

पारण समय
05:36–20:33
14 घं 57 मि · Tithika की परिपाटी

योगिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • सोमवार 5 जुलाई
  • 05:35व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 6 जुलाई
  • 05:36–20:33पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंयोगिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में योगिनी एकादशी सोम 5 जुलाई को क्यों है?

योगिनी एकादशी सोम 5 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 18:26 रवि से 21:00 तक।

एकादशी 21:00 सोम पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 5 जुलाई को सूर्योदय पर है, 05:35: सोम 5 जुलाई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 18:26 रवि पर, उससे (03:59–05:35) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · मंगल 6 जुलाई, 05:36–20:33 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 5 जुलाई 21:00 से मंगल 6 जुलाई 23:32 तक है; हरिवासर 03:38 पर पूरा होता है। इसलिए पारण मंगल 6 जुलाई को सूर्योदय (05:36) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (20:33) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:35 तक, करते हैं।

नियम

आषाढ़ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।