Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में योगिनी एकादशी 2004 पारण समय 06:40–10:06, सोम 14 जून
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में योगिनी एकादशी 2004 कब है?
रविवार 13 जून
आषाढ़ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में रवि 13 जून का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
सोमवार 14 जून
योगिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
- रविवार 13 जून
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06:40व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 14 जून
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06:40–10:06पारण समयव्रत खोलने का समय
Ipameri में योगिनी एकादशी रवि 13 जून को क्यों है?
योगिनी एकादशी रवि 13 जून को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।
दशमी 06:23 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:23 से 08:02 रवि तक।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:23 शनि से 08:02 तक।
द्वादशी: 08:02 रवि से 10:06 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, शनि 12 जून को 06:40 और रवि 13 जून को 06:40। एकादशी (शनि 12 जून 06:23 से रवि 13 जून 08:02 तक) और द्वादशी (रवि 13 जून 08:02 से सोम 14 जून 10:06 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: रवि 13 जून। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: शनि 12 जून को दशमी 06:23 तक है, उसके भीतर (05:04–06:40); रवि 13 जून को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · सोम 14 जून, 06:40–10:06
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 13 जून 08:02 से सोम 14 जून 10:06 तक है; हरिवासर 14:33 रवि पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 14 जून को सूर्योदय (06:40) से होता है।
नियम
आषाढ़ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।