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Pāthardi, महाराष्ट्र में विजया एकादशी 2027 पारण समय 06:45⁠–⁠09:54, शुक्र 5 मार्च

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में विजया एकादशी 2027 कब है?

गुरुवार 4 मार्च

फाल्गुन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · माघ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Pāthardi में गुरु 4 मार्च का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 5 मार्च

पारण समय
06:45–09:54
3 घं 9 मि

विजया एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 4 मार्च
  • 06:46व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 5 मार्च
  • 06:45–09:54पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंविजया एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में विजया एकादशी गुरु 4 मार्च को क्यों है?

विजया एकादशी गुरु 4 मार्च को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:44 से 07:24 गुरु तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:44 बुध से 07:24 तक।

द्वादशी: 07:24 गुरु से 09:54 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, बुध 3 मार्च को 06:47 और गुरु 4 मार्च को 06:46। एकादशी (बुध 3 मार्च 04:44 से गुरु 4 मार्च 07:24 तक) और द्वादशी (गुरु 4 मार्च 07:24 से शुक्र 5 मार्च 09:54 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: गुरु 4 मार्च। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दो सूर्योदयों पर हो तो वे भी दूसरे दिन व्रत रखते हैं।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 5 मार्च, 06:45–09:54

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 4 मार्च 07:24 से शुक्र 5 मार्च 09:54 तक है; हरिवासर 14:02 गुरु पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 5 मार्च को सूर्योदय (06:45) से होता है।

नियम

फाल्गुन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · माघ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।