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Pāthardi, महाराष्ट्र में विजया एकादशी 2026 पारण समय 06:58⁠–⁠16:02, शनि 14 फ़रवरी

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में विजया एकादशी 2026 कब है?

शुक्रवार 13 फ़रवरी

फाल्गुन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · माघ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Pāthardi में शुक्र 13 फ़रवरी का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 14 फ़रवरी

पारण समय
06:58–16:02
9 घं 4 मि

विजया एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शुक्रवार 13 फ़रवरी
  • 06:58व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 14 फ़रवरी
  • 06:58–16:02पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंविजया एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में विजया एकादशी शुक्र 13 फ़रवरी को क्यों है?

विजया एकादशी शुक्र 13 फ़रवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 12:22 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 12:22 गुरु से 14:26 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 13 फ़रवरी को सूर्योदय पर है, 06:58: शुक्र 13 फ़रवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 12:22 गुरु पर, उससे (05:22–06:58) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 14 फ़रवरी, 06:58–16:02

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 13 फ़रवरी 14:26 से शनि 14 फ़रवरी 16:02 तक है; हरिवासर 20:50 शुक्र पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 14 फ़रवरी को सूर्योदय (06:58) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:16 तक, करते हैं।

नियम

फाल्गुन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · माघ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।