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Pāthardi, महाराष्ट्र में वरूथिनी एकादशी 2027 पारण समय 06:00⁠–⁠18:52, सोम 3 मई

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में वरूथिनी एकादशी 2027 कब है?

रविवार 2 मई

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Pāthardi में रवि 2 मई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 3 मई

पारण समय
06:00–18:52
12 घं 52 मि · Tithika की परिपाटी

वरूथिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 2 मई
  • 06:00व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 3 मई
  • 06:00–18:52पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंवरूथिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में वरूथिनी एकादशी रवि 2 मई को क्यों है?

वरूथिनी एकादशी रवि 2 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 18:54 शनि से 19:52 तक।

एकादशी 19:52 रवि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 2 मई को सूर्योदय पर है, 06:00: रवि 2 मई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 18:54 शनि पर, उससे (04:24–06:00) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 3 मई, 06:00–18:52 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 2 मई 19:52 से सोम 3 मई 20:04 तक है; हरिवासर 01:55 पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 3 मई को सूर्योदय (06:00) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:52) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:34 तक, करते हैं।

नियम

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।