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Pāthardi, महाराष्ट्र में वरूथिनी एकादशी 2028 पारण समय 06:07⁠–⁠18:48, शुक्र 21 अप्रैल

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में वरूथिनी एकादशी 2028 कब है?

गुरुवार 20 अप्रैल

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Pāthardi में गुरु 20 अप्रैल का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 21 अप्रैल

पारण समय
06:07–18:48
12 घं 41 मि · Tithika की परिपाटी

वरूथिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 20 अप्रैल
  • 06:08व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 21 अप्रैल
  • 06:07–18:48पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंवरूथिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में वरूथिनी एकादशी गुरु 20 अप्रैल को क्यों है?

वरूथिनी एकादशी गुरु 20 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 16:14 बुध से 18:47 तक।

एकादशी 18:47 गुरु पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 20 अप्रैल को सूर्योदय पर है, 06:08: गुरु 20 अप्रैल। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 16:14 बुध पर, उससे (04:32–06:08) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 21 अप्रैल, 06:07–18:48 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 20 अप्रैल 18:47 से शुक्र 21 अप्रैल 21:04 तक है; हरिवासर 01:21 पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 21 अप्रैल को सूर्योदय (06:07) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:48) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:39 तक, करते हैं।

नियम

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।