tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में वरूथिनी एकादशी 1921 पारण समय 06:26⁠–⁠17:52, बुध 4 मई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में वरूथिनी एकादशी 1921 कब है?

मंगलवार 3 मई

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में मंगल 3 मई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 4 मई

पारण समय
06:26–17:52
11 घं 26 मि · Tithika की परिपाटी

वरूथिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 3 मई
  • 06:26व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 4 मई
  • 06:26–17:52पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंवरूथिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में वरूथिनी एकादशी मंगल 3 मई को क्यों है?

वरूथिनी एकादशी मंगल 3 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 18:17 सोम से 19:32 तक।

एकादशी 19:32 मंगल पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 3 मई को सूर्योदय पर है, 06:26: मंगल 3 मई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 18:17 सोम पर, उससे (04:50–06:26) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 4 मई, 06:26–17:52 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 3 मई 19:32 से बुध 4 मई 20:08 तक है; हरिवासर 01:41 पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 4 मई को सूर्योदय (06:26) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:52) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:43 तक, करते हैं।

नियम

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।