tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में वरूथिनी एकादशी 1920 पारण समय 07:18⁠–⁠18:03, गुरु 15 अप्रैल

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में वरूथिनी एकादशी 1920 कब है?

बुधवार 14 अप्रैल

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में बुध 14 अप्रैल का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

गुरुवार 15 अप्रैल

पारण समय
07:18–18:03
10 घं 45 मि · Tithika की परिपाटी

वरूथिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • बुधवार 14 अप्रैल
  • 06:21व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 15 अप्रैल
  • 07:18–18:03पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंवरूथिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में वरूथिनी एकादशी बुध 14 अप्रैल को क्यों है?

वरूथिनी एकादशी बुध 14 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 01:31 से 01:30 गुरु तक।

एकादशी 01:30 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 14 अप्रैल को सूर्योदय पर है, 06:21: बुध 14 अप्रैल। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 01:31 पर, उससे (04:45–06:21) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 15 अप्रैल, 07:18–18:03 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 15 अप्रैल 01:30 से शुक्र 16 अप्रैल 00:43 तक है; हरिवासर 07:18 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:03) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:42 तक, करते हैं।

नियम

वैशाख कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · चैत्र कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।