tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में उत्पन्ना एकादशी 2039 रवि 11 दिसंबर या सोम 12 दिसंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में उत्पन्ना एकादशी 2039 कब है?

स्मार्त

रविवार 11 दिसंबर

वैष्णव

सोमवार 12 दिसंबर

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

Ipameri में रवि 11 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · सोमवार 12 दिसंबर

पारण समय
07:44–18:41
10 घं 57 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · मंगलवार 13 दिसंबर

पारण समय
05:31–18:42
13 घं 11 मि · Tithika की परिपाटी

उत्पन्ना एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • रविवार 11 दिसंबर
  • 05:30व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 12 दिसंबर
  • 07:44–18:41पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • सोमवार 12 दिसंबर
  • 05:31व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 13 दिसंबर
  • 05:31–18:42पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंउत्पन्ना एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में उत्पन्ना एकादशी रवि 11 दिसंबर या सोम 12 दिसंबर को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में उत्पन्ना एकादशी रवि 11 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव सोम 12 दिसंबर को व्रत रखते हैं।

दशमी 04:17 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:17 से 02:22 सोम तक।

एकादशी 02:22 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 04:17 रवि से 02:22 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 11 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:30: रवि 11 दिसंबर।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। रवि 11 दिसंबर को दशमी 04:17 तक है, अरुणोदय (03:54–05:30) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 02:22 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव सोम 12 दिसंबर को व्रत रखते हैं: सोम 12 दिसंबर।

व्रत का पारण

स्मार्त · सोम 12 दिसंबर, 07:44–18:41 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 12 दिसंबर 02:22 से सोम 12 दिसंबर 23:48 तक है; हरिवासर 07:44 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:41) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:09 तक, करते हैं।

वैष्णव · मंगल 13 दिसंबर, 05:31–18:42 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी मंगल 13 दिसंबर को 23:48 सोम पर, रात में, अरुणोदय (03:55) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:31) से सूर्यास्त (18:42) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।