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Pāthardi, महाराष्ट्र में उत्पन्ना एकादशी 2021 पारण समय 07:34⁠–⁠17:49, बुध 1 दिसंबर

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में उत्पन्ना एकादशी 2021 कब है?

मंगलवार 30 नवंबर

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Pāthardi में मंगल 30 नवंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 1 दिसंबर

पारण समय
07:34–17:49
10 घं 15 मि · Tithika की परिपाटी

उत्पन्ना एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 30 नवंबर
  • 06:45व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 1 दिसंबर
  • 07:34–17:49पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंउत्पन्ना एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में उत्पन्ना एकादशी मंगल 30 नवंबर को क्यों है?

उत्पन्ना एकादशी मंगल 30 नवंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:14 से 02:14 बुध तक।

एकादशी 02:14 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 30 नवंबर को सूर्योदय पर है, 06:45: मंगल 30 नवंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 04:14 पर, उससे (05:09–06:45) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 1 दिसंबर, 07:34–17:49 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 1 दिसंबर 02:14 से बुध 1 दिसंबर 23:35 तक है; हरिवासर 07:34 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:49) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:59 तक, करते हैं।

नियम

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।