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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में उत्पन्ना एकादशी 2020 पारण समय 08:14⁠–⁠17:33, शनि 12 दिसंबर

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में उत्पन्ना एकादशी 2020 कब है?

शुक्रवार 11 दिसंबर

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में शुक्र 11 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 12 दिसंबर

पारण समय
08:14–17:33
9 घं 19 मि · Tithika की परिपाटी

उत्पन्ना एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शुक्रवार 11 दिसंबर
  • 08:13व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 12 दिसंबर
  • 08:14–17:33पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंउत्पन्ना एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में उत्पन्ना एकादशी शुक्र 11 दिसंबर को क्यों है?

उत्पन्ना एकादशी शुक्र 11 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 11:21 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 11:21 गुरु से 08:34 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 11 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 08:13: शुक्र 11 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 11:21 गुरु पर, उससे (06:37–08:13) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 12 दिसंबर, 08:14–17:33 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी शनि 12 दिसंबर को 05:32 पर, रात में, अरुणोदय (06:38) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (08:14) से सूर्यास्त (17:33) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।