Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में उत्पन्ना एकादशी 2019 शुक्र 22 नवंबर या शनि 23 नवंबर
व्रत · समय UTC+4 में
Sevan में उत्पन्ना एकादशी 2019 कब है?
स्मार्त
शुक्रवार 22 नवंबर
वैष्णव
शनिवार 23 नवंबर
मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Sevan में शुक्र 22 नवंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शनिवार 23 नवंबर
वैष्णव · रविवार 24 नवंबर
उत्पन्ना एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- शुक्रवार 22 नवंबर
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07:53व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 23 नवंबर
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10:13–17:37पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शनिवार 23 नवंबर
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07:54व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 24 नवंबर
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07:55–17:36पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Sevan में उत्पन्ना एकादशी शुक्र 22 नवंबर या शनि 23 नवंबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में उत्पन्ना एकादशी शुक्र 22 नवंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव शनि 23 नवंबर को व्रत रखते हैं।
दशमी 07:31 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 07:31 से 04:54 शनि तक।
एकादशी 04:54 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 07:31 शुक्र से 04:54 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 22 नवंबर को सूर्योदय पर है, 07:53: शुक्र 22 नवंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शुक्र 22 नवंबर को दशमी 07:31 तक है, अरुणोदय (06:17–07:53) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 04:54 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव शनि 23 नवंबर को व्रत रखते हैं: शनि 23 नवंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · शनि 23 नवंबर, 10:13–17:37 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 23 नवंबर 04:54 से रवि 24 नवंबर 02:13 तक है; हरिवासर 10:13 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:37) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:51 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · रवि 24 नवंबर, 07:55–17:36 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी रवि 24 नवंबर को 02:13 पर, रात में, अरुणोदय (06:19) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (07:55) से सूर्यास्त (17:36) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।