Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में उत्पन्ना एकादशी 2020 गुरु 10 दिसंबर या शुक्र 11 दिसंबर
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में उत्पन्ना एकादशी 2020 कब है?
स्मार्त
गुरुवार 10 दिसंबर
वैष्णव
शुक्रवार 11 दिसंबर
मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में गुरु 10 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शुक्रवार 11 दिसंबर
वैष्णव · शनिवार 12 दिसंबर
उत्पन्ना एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- गुरुवार 10 दिसंबर
-
05:30व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 11 दिसंबर
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06:49–18:41पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शुक्रवार 11 दिसंबर
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05:31व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 12 दिसंबर
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05:31–18:42पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में उत्पन्ना एकादशी गुरु 10 दिसंबर या शुक्र 11 दिसंबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में उत्पन्ना एकादशी गुरु 10 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव शुक्र 11 दिसंबर को व्रत रखते हैं।
दशमी 04:21 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:21 से 01:34 शुक्र तक।
एकादशी 01:34 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 04:21 गुरु से 01:34 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 10 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:30: गुरु 10 दिसंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। गुरु 10 दिसंबर को दशमी 04:21 तक है, अरुणोदय (03:54–05:30) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 01:34 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव शुक्र 11 दिसंबर को व्रत रखते हैं: शुक्र 11 दिसंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · शुक्र 11 दिसंबर, 06:49–18:41 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 11 दिसंबर 01:34 से शुक्र 11 दिसंबर 22:32 तक है; हरिवासर 06:49 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:41) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:09 तक, करते हैं।
वैष्णव · शनि 12 दिसंबर, 05:31–18:42 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शनि 12 दिसंबर को 22:32 शुक्र पर, रात में, अरुणोदय (03:55) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:31) से सूर्यास्त (18:42) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।