tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में उत्पन्ना एकादशी 1986 पारण समय 07:38⁠–⁠19:33, शुक्र 28 नवंबर

व्रत · समय UTC−2 में

Ipameri में उत्पन्ना एकादशी 1986 कब है?

गुरुवार 27 नवंबर

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में गुरु 27 नवंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 28 नवंबर

पारण समय
07:38–19:33
11 घं 55 मि · Tithika की परिपाटी

उत्पन्ना एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 27 नवंबर
  • 06:28व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 28 नवंबर
  • 07:38–19:33पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंउत्पन्ना एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में उत्पन्ना एकादशी गुरु 27 नवंबर को क्यों है?

उत्पन्ना एकादशी गुरु 27 नवंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:21 से 02:08 शुक्र तक।

एकादशी 02:08 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 03:21 गुरु से 02:08 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 27 नवंबर को सूर्योदय पर है, 06:28: गुरु 27 नवंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 03:21 पर, उससे (04:52–06:28) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 28 नवंबर, 07:38–19:33 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 28 नवंबर 02:08 से शनि 29 नवंबर 00:08 तक है; हरिवासर 07:38 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:33) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:05 तक, करते हैं।

नियम

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।