Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में उत्पन्ना एकादशी 1939 पारण समय 05:29–18:38, गुरु 7 दिसंबर
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में उत्पन्ना एकादशी 1939 कब है?
बुधवार 6 दिसंबर
मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में बुध 6 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
गुरुवार 7 दिसंबर
उत्पन्ना एकादशी का समय: व्रत, पारण
- बुधवार 6 दिसंबर
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05:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
- गुरुवार 7 दिसंबर
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05:29–18:38पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में उत्पन्ना एकादशी बुध 6 दिसंबर को क्यों है?
उत्पन्ना एकादशी बुध 6 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:50 से 23:08 तक।
एकादशी 23:08 बुध पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 6 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:29: बुध 6 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:50 पर, उससे (03:53–05:29) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · गुरु 7 दिसंबर, 05:29–18:38 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 6 दिसंबर 23:08 से गुरु 7 दिसंबर 21:37 तक है; हरिवासर 04:45 पर पूरा होता है। इसलिए पारण गुरु 7 दिसंबर को सूर्योदय (05:29) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:38) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:07 तक, करते हैं।
नियम
मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।