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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में उत्पन्ना एकादशी 1921 पारण समय 05:28⁠–⁠12:53, शनि 26 नवंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में उत्पन्ना एकादशी 1921 कब है?

शुक्रवार 25 नवंबर

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शुक्र 25 नवंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 26 नवंबर

पारण समय
05:28–12:53
7 घं 25 मि

उत्पन्ना एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शुक्रवार 25 नवंबर
  • 05:28व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 26 नवंबर
  • 05:28–12:53पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंउत्पन्ना एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में उत्पन्ना एकादशी शुक्र 25 नवंबर को क्यों है?

उत्पन्ना एकादशी शुक्र 25 नवंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 15:55 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 15:55 गुरु से 14:18 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 25 नवंबर को सूर्योदय पर है, 05:28: शुक्र 25 नवंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 15:55 गुरु पर, उससे (03:52–05:28) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 26 नवंबर, 05:28–12:53

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 25 नवंबर 14:18 से शनि 26 नवंबर 12:53 तक है; हरिवासर 19:56 शुक्र पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 26 नवंबर को सूर्योदय (05:28) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:05 तक, करते हैं।

नियम

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।