tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में उत्पन्ना एकादशी 1920 पारण समय 06:59⁠–⁠18:38, सोम 6 दिसंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में उत्पन्ना एकादशी 1920 कब है?

रविवार 5 दिसंबर

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में रवि 5 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 6 दिसंबर

पारण समय
06:59–18:38
11 घं 39 मि · Tithika की परिपाटी

उत्पन्ना एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 5 दिसंबर
  • 05:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 6 दिसंबर
  • 06:59–18:38पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंउत्पन्ना एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में उत्पन्ना एकादशी रवि 5 दिसंबर को क्यों है?

उत्पन्ना एकादशी रवि 5 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:13 से 00:44 सोम तक।

एकादशी 00:44 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 5 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:29: रवि 5 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:13 पर, उससे (03:53–05:29) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 6 दिसंबर, 06:59–18:38 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 6 दिसंबर 00:44 से मंगल 7 दिसंबर 01:44 तक है; हरिवासर 06:59 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:38) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:07 तक, करते हैं।

नियम

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · कार्तिक कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।