Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2089 2089 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में सफला एकादशी 2089 कब है?
2089 में दो बार
शुक्रवार 7 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में शुक्र 7 जनवरी का पूरा पंचांगमंगलवार 27 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में मंगल 27 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
शनिवार 8 जनवरी
बुधवार 28 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
शुक्र 7 जनवरी
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05:45व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 8 जनवरी
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05:45–09:44पारण समयव्रत खोलने का समय
मंगल 27 दिसंबर
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05:38व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 28 दिसंबर
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05:39–14:20पारण समयव्रत खोलने का समय
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
शुक्र 7 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी शुक्र 7 जनवरी को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।
दशमी 05:28 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:28 से 07:26 शुक्र तक।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:28 गुरु से 07:26 तक।
द्वादशी: 07:26 शुक्र से 09:44 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, गुरु 6 जनवरी को 05:44 और शुक्र 7 जनवरी को 05:45। एकादशी (गुरु 6 जनवरी 05:28 से शुक्र 7 जनवरी 07:26 तक) और द्वादशी (शुक्र 7 जनवरी 07:26 से शनि 8 जनवरी 09:44 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: शुक्र 7 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: गुरु 6 जनवरी को दशमी 05:28 तक है, उसके भीतर (04:08–05:44); शुक्र 7 जनवरी को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · शनि 8 जनवरी, 05:45–09:44
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 7 जनवरी 07:26 से शनि 8 जनवरी 09:44 तक है; हरिवासर 14:00 शुक्र पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 8 जनवरी को सूर्योदय (05:45) से होता है।
मंगल 27 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी मंगल 27 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 14:28 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 14:28 सोम से 14:12 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 27 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:38: मंगल 27 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 14:28 सोम पर, उससे (04:02–05:38) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · बुध 28 दिसंबर, 05:39–14:20
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 27 दिसंबर 14:12 से बुध 28 दिसंबर 14:20 तक है; हरिवासर 20:14 मंगल पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 28 दिसंबर को सूर्योदय (05:39) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:17 तक, करते हैं।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।