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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2082 पारण समय 06:07⁠–⁠18:44, बुध 16 दिसंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में सफला एकादशी 2082 कब है?

मंगलवार 15 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में मंगल 15 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 16 दिसंबर

पारण समय
06:07–18:44
12 घं 37 मि · Tithika की परिपाटी

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 15 दिसंबर
  • 05:32व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 16 दिसंबर
  • 06:07–18:44पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में सफला एकादशी मंगल 15 दिसंबर को क्यों है?

सफला एकादशी मंगल 15 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:44 से 00:54 बुध तक।

एकादशी 00:54 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 15 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:32: मंगल 15 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 03:44 पर, उससे (03:56–05:32) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 16 दिसंबर, 06:07–18:44 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 16 दिसंबर 00:54 से बुध 16 दिसंबर 21:47 तक है; हरिवासर 06:07 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:44) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:11 तक, करते हैं।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।