Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2081 2081 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में सफला एकादशी 2081 कब है?
2081 में दो बार
रविवार 5 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में रवि 5 जनवरी का पूरा पंचांगशुक्रवार 26 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में शुक्र 26 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
सोमवार 6 जनवरी
शनिवार 27 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
रवि 5 जनवरी
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05:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 6 जनवरी
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05:44–17:26पारण समयव्रत खोलने का समय
शुक्र 26 दिसंबर
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05:37व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 27 दिसंबर
-
04:02–04:38पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
रवि 5 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी रवि 5 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 16:17 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 16:17 शनि से 16:39 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 5 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:44: रवि 5 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 16:17 शनि पर, उससे (04:08–05:44) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · सोम 6 जनवरी, 05:44–17:26
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 5 जनवरी 16:39 से सोम 6 जनवरी 17:26 तक है; हरिवासर 22:50 रवि पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 6 जनवरी को सूर्योदय (05:44) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:22 तक, करते हैं।
शुक्र 26 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी शुक्र 26 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 08:06 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 08:06 गुरु से 06:18 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 26 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:37: शुक्र 26 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 08:06 गुरु पर, उससे (04:01–05:37) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · शनि 27 दिसंबर, 04:02–04:38 (अरुणोदय से, Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शनि 27 दिसंबर को 04:38 पर, अरुणोदय (04:02) लगने के बाद और सूर्योदय (05:38) से पहले, समाप्त होती है। द्वादशी छोटी हो तो निर्णयसिंधु, मत्स्य पुराण के अनुसार, पारण भोर में, द्वादशी समाप्त होने से पहले कराता है। Tithika इसे अरुणोदय से आरंभ करता है: Tithika की परिपाटी।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।