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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2078 2078 में 2 तारीख़ें

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में सफला एकादशी 2078 कब है?

2078 में दो बार

रविवार 9 जनवरी

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में रवि 9 जनवरी का पूरा पंचांग

गुरुवार 29 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में गुरु 29 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 10 जनवरी

पारण समय
05:47–18:53
13 घं 6 मि · Tithika की परिपाटी

शुक्रवार 30 दिसंबर

पारण समय
05:40–18:50
13 घं 10 मि · Tithika की परिपाटी

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

रवि 9 जनवरी

  • 05:46व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 10 जनवरी
  • 05:47–18:53पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

गुरु 29 दिसंबर

  • 05:39व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 30 दिसंबर
  • 05:40–18:50पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?

चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।

रवि 9 जनवरी क्यों?

सफला एकादशी रवि 9 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 20:19 शनि से 22:04 तक।

एकादशी 22:04 रवि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 9 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:46: रवि 9 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 20:19 शनि पर, उससे (04:10–05:46) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 10 जनवरी, 05:47–18:53 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 9 जनवरी 22:04 से सोम 10 जनवरी 23:09 तक है; हरिवासर 04:20 पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 10 जनवरी को सूर्योदय (05:47) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:53) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:24 तक, करते हैं।

गुरु 29 दिसंबर क्यों?

सफला एकादशी गुरु 29 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 15:59 बुध से 18:47 तक।

एकादशी 18:47 गुरु पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 29 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:39: गुरु 29 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 15:59 बुध पर, उससे (04:03–05:39) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 30 दिसंबर, 05:40–18:50 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 29 दिसंबर 18:47 से शुक्र 30 दिसंबर 21:31 तक है; हरिवासर 01:28 पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 30 दिसंबर को सूर्योदय (05:40) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:50) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:18 तक, करते हैं।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।