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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2065 2065 में 2 तारीख़ें

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में सफला एकादशी 2065 कब है?

2065 में दो बार

शुक्रवार 2 जनवरी

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शुक्र 2 जनवरी का पूरा पंचांग

बुधवार 23 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में बुध 23 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 3 जनवरी

पारण समय
06:08–18:52
12 घं 44 मि · Tithika की परिपाटी

गुरुवार 24 दिसंबर

पारण समय
05:36–16:00
10 घं 24 मि

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

शुक्र 2 जनवरी

  • 05:42व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 3 जनवरी
  • 06:08–18:52पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

बुध 23 दिसंबर

  • 05:36व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 24 दिसंबर
  • 05:36–16:00पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?

चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।

शुक्र 2 जनवरी क्यों?

सफला एकादशी शुक्र 2 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:12 से 00:44 शनि तक।

एकादशी 00:44 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 2 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:42: शुक्र 2 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 03:12 पर, उससे (04:06–05:42) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 3 जनवरी, 06:08–18:52 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 3 जनवरी 00:44 से शनि 3 जनवरी 22:18 तक है; हरिवासर 06:08 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:52) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:20 तक, करते हैं।

बुध 23 दिसंबर क्यों?

सफला एकादशी बुध 23 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 21:54 मंगल से 19:10 तक।

एकादशी 19:10 बुध पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 23 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:36: बुध 23 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 21:54 मंगल पर, उससे (04:00–05:36) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 24 दिसंबर, 05:36–16:00

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 23 दिसंबर 19:10 से गुरु 24 दिसंबर 16:00 तक है; हरिवासर 00:22 पर पूरा होता है। इसलिए पारण गुरु 24 दिसंबर को सूर्योदय (05:36) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:15 तक, करते हैं।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।