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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2049 पारण समय 05:35⁠–⁠18:46, मंगल 21 दिसंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में सफला एकादशी 2049 कब है?

सोमवार 20 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में सोम 20 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

मंगलवार 21 दिसंबर

पारण समय
05:35–18:46
13 घं 11 मि · Tithika की परिपाटी

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • सोमवार 20 दिसंबर
  • 05:34व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 21 दिसंबर
  • 05:35–18:46पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में सफला एकादशी सोम 20 दिसंबर को क्यों है?

सफला एकादशी सोम 20 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 23:03 रवि से 22:50 तक।

एकादशी 22:50 सोम पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 20 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:34: सोम 20 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 23:03 रवि पर, उससे (03:58–05:34) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · मंगल 21 दिसंबर, 05:35–18:46 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 20 दिसंबर 22:50 से मंगल 21 दिसंबर 21:50 तक है; हरिवासर 04:35 पर पूरा होता है। इसलिए पारण मंगल 21 दिसंबर को सूर्योदय (05:35) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:46) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:13 तक, करते हैं।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।