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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2044 पारण समय 05:54⁠–⁠18:43, गुरु 15 दिसंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में सफला एकादशी 2044 कब है?

बुधवार 14 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में बुध 14 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

गुरुवार 15 दिसंबर

पारण समय
05:54–18:43
12 घं 49 मि · Tithika की परिपाटी

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • बुधवार 14 दिसंबर
  • 05:32व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 15 दिसंबर
  • 05:54–18:43पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में सफला एकादशी बुध 14 दिसंबर को क्यों है?

सफला एकादशी बुध 14 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 23:04 मंगल से 23:39 तक।

एकादशी 23:39 बुध पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 14 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:32: बुध 14 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 23:04 मंगल पर, उससे (03:56–05:32) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 15 दिसंबर, 05:54–18:43 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 14 दिसंबर 23:39 से शुक्र 16 दिसंबर 00:39 तक है; हरिवासर 05:54 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:43) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:10 तक, करते हैं।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।