Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2043 2043 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में सफला एकादशी 2043 कब है?
2043 में दो बार
मंगलवार 6 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में मंगल 6 जनवरी का पूरा पंचांगशनिवार 26 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में शनि 26 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
बुधवार 7 जनवरी
रविवार 27 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
मंगल 6 जनवरी
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05:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 7 जनवरी
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06:37–18:53पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
शनि 26 दिसंबर
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05:37व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 27 दिसंबर
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05:38–18:49पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
मंगल 6 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी मंगल 6 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 21:51 सोम से 00:10 बुध तक।
एकादशी 00:10 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 6 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:44: मंगल 6 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 21:51 सोम पर, उससे (04:08–05:44) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · बुध 7 जनवरी, 06:37–18:53 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 7 जनवरी 00:10 से गुरु 8 जनवरी 01:59 तक है; हरिवासर 06:37 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:53) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:22 तक, करते हैं।
शनि 26 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी शनि 26 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 18:21 शुक्र से 20:48 तक।
एकादशी 20:48 शनि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 26 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:37: शनि 26 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 18:21 शुक्र पर, उससे (04:01–05:37) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · रवि 27 दिसंबर, 05:38–18:49 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 26 दिसंबर 20:48 से रवि 27 दिसंबर 23:25 तक है; हरिवासर 03:27 पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 27 दिसंबर को सूर्योदय (05:38) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:49) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:16 तक, करते हैं।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।